लाश की गवाही - भाग 2
कभी कभी सच एक धमाके के साथ आपके सामने फट पड़ता है I आप हतप्रभ रह जाते हैंI अविश्वश्नीय, कल्पना से परेI ये एक ऐसी ही कहानी हैI अब दुर्भाग्यवश या सौभाग्यवश कहूँ, ये एक सत्य घटना पर आधारित हैI
वो और हम..............
उसका नाम बदल देता है, उसके आगे सब फिका लगता है, शांति के करीब वहीं तो ले जाता है, सुकून से वो राब्ता कराता है.
कभी तो...............
माना कि हम सबकुछ कर सकते है, हर चीज़ को हासिल कर सकते है, पर कभी तो ड़रना भी चाहिए, गलत सोच और गलत काम से गुरेज़ करना भी चाहिए.
मैं रेत की तरह ...........
कमाल है ऐ रेत भी, चमकती है ऐ रेत भी, दर्पण है समाज का कहानी कहती है रेत भी, साहिल का किनारा इसका है सारा, बदलती है खुद को ऐसे जैसे पूरा जहान है इसका, सारा का सारा.
मैं गुस्सा.................
खराब वक्त की घंटी हूँ मैं, तबाही की दस्तक हूँ मैं, हर शय है घर मेरा, भगाओं मुझे नहीं तो खा जाऊँगा मैं.
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