दर्द दरवाजे का

Feelings of a door

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Deepika Jain
Deepika Jain 05 Sep, 2026 | 1 min read
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दर्द दरवाजे का

ऐ इंसान, क्या फितरत तूने पाई है

साथ न रह सका अपनों के

मुझको भी यही सजा सुनाई है

तूने चुना परिवार एकल

मुझको भी एकल कर दिया

किसके संग अब बतियाऊं मैं

रह गया मैं तो बिल्कुल तन्हा

हंसता था अपनी महबूबा संग

गले भी उसके लगता था

चलती थी जब हवा मदमस्त

संग उसके झूमा करता था

मजबूती का बंधन हमारा

तुमको भी सुरक्षा देता था

तन्हाई ने मुझको अब

खामोश सा कर दिया 

आंसूओ ने भी मुझको

अब कमजोर कर दिया

 कैसे दूं सुरक्षा तुमको

मैं दर्द से भरा हुआ

 दर्द समझ लो मेरा तुम

मेरी महबूबा लौटा दो 

एकल दरवाज़े की जगह

 कुंडी वाला दरवाज़ा लगवा दो

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