Titleरिश्तों की डोर
मैंने उसे मुक्त कर दिया। पर उस आवारा पतंग को एक डोर से बांध भी दिया था कि शायद वह फिर आए पलट कर! और देख आ गया।
चीन को चेतावनी
चीन को चेतावनी इन आंधियों से तूफानों से हारेंगे न हम जीत जाएंगें, लौ जलाकर अब विश्वास की देखना तुम पर विजय पाएंगें।
रिश्तों की नोकझोंक।...
इल्ज़ाम के दौर में एहतराम किसे पसंद आता है। मज़ाक की हद रखें , कम अग़र सब्र का माद्दा है। गिरेबान में खुद के कहाँ किसी ने झांका है। गलतियों की फेहरिस्त में खुदको सबने कम आंका है। अपनी और अपनों की गलती में,होता अपना ही घाटा है। ऐसे हालातों में रिश्ता तो रहता है ,मगर भरोसा टूट जाता है।
#Sourabh
पापा
पिता होना, पिता होकर ही बेहतर पता चलता होगा
#Life #Daughter's feel #Father's Day #Father love
एक सिपाही जो मरणोपरांत भी देश सेवा में रत है। भाग - 1
एक सिपाही की देश सेवा की अद्भुत कहानी
पिता वृक्ष के समान है।
दुनिया के हर पिता को समर्पित मेरी यह रचना!
#Hindi poem #Father's day
योग दिवस पर दोहे
आज 21 जून अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर मुझ अकिंचन कलम के सिपाही का लोगों के नाम कुछ संदेश
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