श्रावण मास की पूर्णिमा और राखी का यह त्योहार,
महादेव की भक्ति से बढ़ता रहे भाई-बहनों का प्यार,
बाँधें बहनें अपना निश्छल प्रेम दो सूत कच्चे धागों में,
लड़ें-झगड़ें ख़ूब मगर कमी न आए, कभी अनुरागों में,
राखी के धागों में अदृश्य रक्षा कवच बहनें बाँधती हैं,
भाइयों की सकुशलता का वर, शिव जी से माँगती हैं,
देता है भाई वचन बहनों को, आमरण रक्षा करने का,
बुरे-भले समयों में हाथ थामे उनके ही साथ डटने का,
कच्चे सूत की ये राखियाँ भाइयों का उत्साह बढ़ाती हैं,
बहनों के प्रति उनके कर्तव्य का स्मरण उन्हें कराती हैं,
नेग माँगती हैं बहनें राखी बाँधकर, हक़ पूरा जताती हैं,
भाइयों के प्रति स्नेह अपना लड़-झगड़ के ही दर्शाती हैं,
चाहती हैं कि भाई उनका हो सफल, वो छुए आसमान,
समझे उनकी भी आकांक्षाएँ, समझे उनके भी अरमान,
भाई के सपने उड़ान भरें तो, वो भी बहनों को पर तो दे,
सामाजिक बेड़ियाँ रोकें न उन्हें, वो उन्हें इतना भर तो दे,
बने भाई भी बल बहन का, उनकी इच्छाशक्ति को बढ़ाए,
भाइयों को मिली सक्षमता, बहनों के भी कुछ काम आए,
कच्चे धागों की राखी का, भाइयों! इतना तो फर्ज़ निभाएँ,
बहनों के आशीर्वाद से आगे बढ़ें और उन्हें भी आगे बढ़ाएँ।
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