तृतीयम चंद्रघंटा

नवरात्र का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा का ध्यान

Sonnu Lamba
12 Oct, 2026 • 0 mins read min read • hi
❤️ 1 💬 0 👁 10


भय कितना बड़ा दानव है, ये बात वही व्यक्ति जानता है, जिसके मन में ये ठहर जाता है। भय किसी भी चीज़ का हो सकता है, वही बात जो आपको डराती है, वह किसी और के लिए छोटी हो सकती हैं, लेकिन आपके पूरे व्यक्तित्व को लील जाती है। भय चेतन से लेकर अवचेतन तक आपके मस्तिष्क में कहीं भी घर बना लेता है, और बार बार आपको डराता है, उससे दूर भागने के बजाय ठहरकर उसको देखा जाना जरूरी है, और फिर आत्म ज्ञान का सहारे आगे बढ़ना ही मुक्ति का एकमात्र विकल्प है।


भय को दूर ज्ञान से ही किया जा सकता है, ज्ञान की रोशनी में हम चेतन मन के भय से मुक्त हो जाते हैं तो प्रेम और परमात्मा के प्रति समर्पण अवचेतन मन के डरों से मुक्त होने में मदद करता है, इस ठहराव को पानें के लिए ध्यान की शरण में जाना पड़ता है।


तृतीयम् चंद्रघंटा ....

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।


आज मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाकर मां चंद्रघंटा की ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है।

जय मां 🙏

1 like
☕

Support Sonnu Lamba

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Sonnu Lamba
Published By

Sonnu Lamba

@sonnulamba

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

8 0
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

9 0
Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 11 Oct, 2026 • 0 mins read min

द्वितीय ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि का दूसरा दिन, ब्रह्मचारिणी स्वरूप का चिंतन मनन।

9 1
Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 11 Oct, 2026 • 1 min read min

प्रथमम् शैलपुत्री

नवरात्रि का पहला दिन, मां शैलपुत्री की अराधना का दिन...

10 1