प्रस्तावना
भक्ति और समर्पण के पर्व नवरात्र की शुरुआत होती है, पितृ विसर्जनी अमावस से, इसी दिन मां का आगमन होता है। और चित्त एक साथ कई तरह के भावों से भरता जाता है।
प्रस्तावना...!
“अच्छा लग रहा है” और “अच्छा नहीं लग रहा है”, इन दो भावों के बीच ही मन की भगदौड़ जारी रहती है। हमारा मन और जीवन इन्हीं के बीच झूलता रहता है। इन्हीं भावों के सहारे हम आसक्ति के जंजाल में फँसते जाते हैं।
कितना अच्छा हो कि हम इन भावों से थोड़ा फासला रखकर इन्हें देखें, थोड़ी दूर से, और धीरे-धीरे इनके बीच आकर खड़े हो जाएँ।
कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने विचलित अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के मध्य लाकर खड़ा किया था। अर्जुन को मध्य में स्थित करके ही उन्होंने गीता का उपदेश दिया। मध्य में आकर ही चीजें साफ दिखाई देनी शुरू होती हैं। जब हम किसी एक पक्ष से बँधे नहीं होते, तभी जीवन को उसकी पूरी तस्वीर में देख पाते हैं।
इस सृष्टि में ईश्वर से बड़ा कोई सारथी नहीं और मन से बड़ा कोई कुरुक्षेत्र नहीं। मन के इस कुरुक्षेत्र में संतुलन और समभाव की शक्ति हमें ईश्वर की शरण में आकर ही प्राप्त होती है। समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही वह मार्ग है, जो हमें भावों के उतार-चढ़ाव के बीच स्थिर रहना सिखाता है।
माँ दुर्गा के नौ रूप इसी शक्ति, संतुलन और चेतना के विविध स्वरूपों का बोध कराते हैं। माँ के प्रत्येक रूप में जीवन के लिए एक संदेश छिपा है। कहीं धैर्य और तपस्या है, कहीं साहस और करुणा, तो कहीं अज्ञान पर विजय पाने और स्वयं के भीतर की शक्ति को पहचानने का आह्वान। माँ के इन स्वरूपों का स्मरण केवल उपासना नहीं, बल्कि जीवन को एक नई दृष्टि से देखने का अवसर भी है।
पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता हो या मातृशक्ति के प्रति समर्पण, दोनों ही भाव हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। एक हमें अपने पूर्वजों के प्रति आभार का स्मरण कराता है, तो दूसरा जीवन में शक्ति, विश्वास और नवचेतना का संचार करता है।
आइए, माँ के नौ स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनके संदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। माँ की कृपा से हमारे भीतर धैर्य, विवेक और समभाव का जागरण हो, ताकि जीवन के कुरुक्षेत्र में हम विचलित होने के बजाय साक्षी भाव से परिस्थितियों को देख सकें और समर्पण के साथ अपने मार्ग पर आगे बढ़ सकें।
जय माँ 🙏
~ सोनू लांबा
Comments
Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓
No comments yet.
Be the first to express what you feel 🥰.
Please Login or Create a free account to comment.