Aman G Mishra
Aman G Mishra 11 Aug, 2019 | 1 min read

सुषमा स्वराज

" आपको गाँठे खोलना नही आता, मसखरी के अलावा कुछ बोलना नही आता"

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 11 Aug, 2019 | 1 min read

Story: Importance

आप अपने जीवन में आई किसी भी चीज़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। पत्नी के जन्मदिन पर पति ने उसे एक कार उपहार में दी। पहले उसने कार की चाबियाँ सौंपीं, फिर एक पैकेट दिया जिसमें पत्नी के ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य तमाम काग़ज़ात थे। इसके बाद उसने देर तक पत्नी का आलिंगन किया। फिर उसने प्रस्ताव रखा कि मैं बच्चों का ध्यान रखूँगा, तुम कुछ देर अपनी नई कार की सवारी का आनंद लो। पत्नी ने उसे धन्यवाद दिया, उसका चुंबन लिया और फिर कार लेकर चल पड़ी। वह मुश्किल से एक किलोमीटर ही गई होगी कि उसकी नई-नवेली कार सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। उसे ख़ुद को तो चोट नहीं आई लेकिन कार में गहरी खरोंच पड़ गई। ये देखकर वह अपराधबोध में डूब गई, “अब मैं उनसे क्या कहूँगी? ये सब देखकर वे क्या कहेंगे?” उसके दिमाग़ में विचारों का तूफ़ान चल ही रहा था कि पुलिस भी आ पहुँची। उन्होंने कहा, “क्या हम आपका लाइसेंस देख सकते हैं?” उसके हाथ अभी भी काँप रहे थे, उसने वह पैकेट उठाया जो उसके पति ने उसे दिया था। उसमें से लाइसेंस निकालते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। तभी उसका ध्यान उस पैकेट पर लगी एक पर्ची पर गया जिस पर उसके पति ने अपने हाथ से लिखा हुआ था, “प्रिये, यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो प्लीज़ यह याद रखना कि जिसे मैं प्रेम करता हूँ वह तुम हो, कार नहीं - तुम्हें प्रेम करने वाला।”

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 1 min read

कर्म

गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को 'कर्म' के विषय समझाते हुए यह कहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य हर समय कोई न कोई काम करता ही है और कर्म ना करने से बेहतर है कि कुछ न कुछ करते ही रहो। उसी से शरीर निर्वाह भी संभव है। तब अर्जुन भगवान से पूछते हैं कि भगवान आप तो सर्वव्यापी परमेश्वर हैं आपके पास तो किसी भी चीज का अभाव नहीं है तब आप क्यों कर्म करते हैं? भगवान इस प्रश्न का एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही प्रशंसनीय जवाब देते हैं अर्जुन मैं जो जो कार्य करता हूँ, मेरा अनुकरण पूरा संसार करता है अगर मैं कार्य करता हूं पूरा संसार मेरे मेरा अनुकरण करते हुए वैसा वैसा ही कार्य करते हैं अगर मैं कार्य करना बंद कर दूं या निष्क्रिय हो जाऊं तो यह संसार भी निष्क्रिय हो जाएगा और संसार का नाश हो जाए इसलिए मेरा कर्म करना जरूरी है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 1 min read

परसाई

हरिशंकर परसाई आज हरिशंकर परसाई जी की पुण्यतिथि पर उनको सादर नमन! हिंदी व्यंग्य की दुनिया में जब भी घुसा जायेगा, परसाई ही परसाई मिलेंगे। मैंने उनकी पहली रचना 'टेलीफोन' पढ़ी थी, जिसके बाद खुद मुझे व्यंग में काफी रूचि बढ़ गयी थी। उसके बाद मैंने उनके द्वारा लिखे गए कई व्यंग पढ़े। आज के साहित्य में वैसा व्यंग मिलना दूभर है, परसाई जी के व्यंग में खास बात ये थी कि वो तमाचा जिसे मारते थे, ताली भी वही बजाता था, बाद में पता चलता कि अरे! मेरी ही खिल्ली उड़ गई। उनके व्यंग्यात्मक निबंधों में सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष देखने को सहज ही मिल जाता है। परसाई जी हिंदी साहित्य जगत में व्यंग के लिए एक अमिट छाप हैं, उनके बिना व्यंग अधूरा है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 0 mins read

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन एक त्यौहार जिसमे बहन अपने भाई को रक्षासूत्र बाँधती हैं, और भाई अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। हिन्दू धर्म का ये पवित्रतम त्यौहार हमें एक पवित्र रिश्ते में जोड़ता है। अतः न सिर्फ हिन्दू धर्म में बल्कि सभी धर्मों में यह त्यौहार मनाया जाना चाहिये,क्योकि भाई और बहन का प्यार किसी मजहब विशेष का मोहताज नही होता। इसीलिए ये रिश्ता पवित्रतम् माना जाता है। जिस तरह भाई अपनी बहन को उसकी सुरक्षा का वादा करते हैं, मैं सभी बहनों से आग्रह करता हूँ कि वो भी अपने भाई को उसकी रक्षा का वादा करें, ये वादा अपने भाई को नशे, कुसंगति, और कुमार्ग पर चलने रोकने का होना चाहिए। बहन अगर अपने भाई से बदले में ये वादा लें कि वो इन गलत रास्तो में नही चलेगा,तो इस तरह से बहन अपने भाई की ज़िंदगी बदल सकती हैं।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 0 mins read

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन एक त्यौहार जिसमे बहन अपने भाई को रक्षासूत्र बाँधती हैं, और भाई अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। हिन्दू धर्म का ये पवित्रतम त्यौहार हमें एक पवित्र रिश्ते में जोड़ता है। अतः न सिर्फ हिन्दू धर्म में बल्कि सभी धर्मों में यह त्यौहार मनाया जाना चाहिये,क्योकि भाई और बहन का प्यार किसी मजहब विशेष का मोहताज नही होता। इसीलिए ये रिश्ता पवित्रतम् माना जाता है। जिस तरह भाई अपनी बहन को उसकी सुरक्षा का वादा करते हैं, मैं सभी बहनों से आग्रह करता हूँ कि वो भी अपने भाई को उसकी रक्षा का वादा करें, ये वादा अपने भाई को नशे, कुसंगति, और कुमार्ग पर चलने रोकने का होना चाहिए। बहन अगर अपने भाई से बदले में ये वादा लें कि वो इन गलत रास्तो में नही चलेगा,तो इस तरह से बहन अपने भाई की ज़िंदगी बदल सकती हैं।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

ग़ज़ल

मछुआरा पानी से डर कर बैठेगा, अँधियारा मुझ में घर कर बैठेगा? मैं हवा, ठहरा, तो क्या रुक गया, अपने घर तूफ़ां भी आकर बैठेगा। छोटी मोटी पतवारों को क्या छेड़ें, ये हाँथ जहाँ बैठेगा जम कर बैठेगा। कुर्सियाँ बिकती हैं खरीद सकते हो, मग़र जो बैठेगा इज़ाज़त लेकर बैठेगा। ग़ज़ल लिखी जाती है ऐसे माहौल में, तू पढ़ने बैठेगा तो संभलकर बैठेगा।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

स्टेशन

रेलवे स्टेशन रेलवे स्टेशन एक ऐसी जगह जहाँ न सिर्फ रेल मिलती है, बल्कि बहुत से मुसाफ़िर अपनी मंजिल, कुछ लोग अपना जीवन,कुछ अपना जीवन साथी पा जाते हैं। हिंदी फिल्मों की तरह कितनी ही प्रेम कहानियाँ रेलवे स्टेशन से शुरू होती हैं। आज उसी रेलवे स्टेशन पर मैं टिकेट बुक कराने के लिए लाइन लगा हुआ हूँ। लाइन इतनी लंबी तो नही है कि खड़े खड़े मेरे घुटनो में दर्द होने लगे,पर इतनी कम भी नही कि फटाफट अपना नम्बर आ जाने में ख़ुशी न हो। एक लड़की मेरे बगल वाली लाइन में खड़ी अपने नम्बर के इन्तजार में है,मेरी तरह ही। पर हिंदुस्तान में बाहर के काम करवाने के लिए जैसे रेलवे टिकट बुक करवाना, गैस सिलेंडर रिफिल करवाना, आदि कामो में लड़कों को ही प्राथमिकता दी जाती है ,इस बजह से लड़कियों की लाइन छोटी है लड़को की अपेक्षा। अब उसका नम्बर भी आने वाला है, यूँ तो लड़की से बात करने का मन तो हो रहा है मेरा, मुझे पसंद भी है। पर बात करने की हिम्मत जुटाने तक में ही बहुत सी कहानियाँ ख़त्म हो जाया करती हैं।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

बच्चे बन जाएं

आओ कुछ पल बच्चे बन जाएँ, आओ कुछ पल सच्चे बन जाएं। न हो किसी से ईर्ष्या, न हो किसी से जलन, कुछ पल के लिए हम झगड़ें, फिर उसके ही दोस्त बन जाएं। आओ कुछ... दिल में हो एक ज़िद, पाने को पूरी दुनिया हो, खोने का न डर हो, अपनी चीजें हम खुद तोड़ें, और फिर खुद बनाएं। आओ कुछ पल... आँखों में हर पल , एक ख्वाब झलकता हो, मिल जाये तो खुश, नही तो हम रूठ जाएँ, कुछ पल के लिए हम रूठे, फिर हम खुश हो जाएं, आओ कुछ पल... छोटी छोटी खुशियाँ हो, छोटी-छोटी चीजें, इन छोटी चीजों में ही, हमारे सब सपने सच हो जाएं, इन छोटी छोटी खुशियां पा , हम भी खुश होने लग जाएँ। आओ कुछ पल... खेल खेल में हम, सारे काम कर जाएँ, इस तन में कुछ फुर्ती पाएं, सयानो को भी बच्चे बना पाए, हम भी अपना बचपना पाएं। हम भी अपना बचपना पाएं।। आओ कुछ पल.... अपने ख्वाबो में ही अपनी दुनिया हो, नित नए नए सपने सजाएँ, दिल में कितना भी दुःख हो, दो आंसुओ में हम सारा दर्द भूल जाएं। आओ कुछ पल बच्चे बन जाएं। आओ कुछ पल सच्चे बन जाएं।। ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

मन का नियंत्रण

मन को नियंत्रित करना क्यों आवश्यक है। आज प्रत्येक व्यक्ति की समस्या है कि मन हमेशा भटकता रहता है, मन नही लगता, या मन दुखी सा रहता है। कई लोग कोशिश करते हैं कि मन को नियंत्रित कैसे करें! पर वो मन को नियंत्रित करने का व्यर्थ ही प्रयास करते हैं। इस विषय में गीता में भगवान समझाते हैं कि मन इतना चंचल है कि इसे रोकना असम्भव है और इसकी गति को रोकने का व्यर्थ प्रयास भी नही करना चाहिए।ये और दुष्परिणाम कारक हो सकता है। फिर करें क्या! मन हमारे शरीर रूपी वाहन का सारथी समान है। अतः मन को रोकने की नही उचित दिशा दिखाने की आवश्यकता होती है। गीता में एक श्लोक का अर्थ है कि इंद्रियों को मन के द्वारा, मन को बुद्धि के द्वारा, बुद्धि को आत्मा के द्वारा, और आत्मा को परमब्रह्म परमेश्वर के द्वारा नियंत्रित करना चाहिए। इसलिए अपनी आत्मा को परमात्मा को सौप दें तो सारी व्यथा स्वतः ही समाप्त हो जाये। - अमन मिश्रा

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