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Neha
Neha 11 Aug, 2019 | 1 min read

My sweet dreams with my mother ??

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Sushma Tiwari
Sushma Tiwari 11 Aug, 2019 | 0 mins read

इन्टरनेट वाली दोस्त

इन्टरनेट हमेशा नुकसान नहीं पहुंचाता

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Shah  طالب  अहमद
Shah طالب अहमद 10 Aug, 2019 | 1 min read

Seems like Smile Story_6

Aaj uski baato me itni saadgi lagi .. shabnam ki pehli boond si taazgi lagi ..

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 1 min read

कर्म

गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को 'कर्म' के विषय समझाते हुए यह कहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य हर समय कोई न कोई काम करता ही है और कर्म ना करने से बेहतर है कि कुछ न कुछ करते ही रहो। उसी से शरीर निर्वाह भी संभव है। तब अर्जुन भगवान से पूछते हैं कि भगवान आप तो सर्वव्यापी परमेश्वर हैं आपके पास तो किसी भी चीज का अभाव नहीं है तब आप क्यों कर्म करते हैं? भगवान इस प्रश्न का एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही प्रशंसनीय जवाब देते हैं अर्जुन मैं जो जो कार्य करता हूँ, मेरा अनुकरण पूरा संसार करता है अगर मैं कार्य करता हूं पूरा संसार मेरे मेरा अनुकरण करते हुए वैसा वैसा ही कार्य करते हैं अगर मैं कार्य करना बंद कर दूं या निष्क्रिय हो जाऊं तो यह संसार भी निष्क्रिय हो जाएगा और संसार का नाश हो जाए इसलिए मेरा कर्म करना जरूरी है।

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Shakeb
Shakeb 10 Aug, 2019 | 1 min read

All because of me!

All because of me!

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Hari
Hari 10 Aug, 2019 | 1 min read

ਭਰੂਣ ਹੱਤਿਆ

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

स्वयं-सुधार

जूझ रहा हूँ, कुछ सूझ रहा हूँ, हर-पल एक पहेली बूझ रहा हूँ। अब हर पहेली का, हल निकाल डालूंगा, अब हार नही मानूंगा।। लड़ता रहा,झगड़ता रहा, खुद से,खुद को मिटाता रहा। अब हरेक गलती को,जड़ से मिटा डालूंगा, अब हार नही मानूंगा।। जमाने की सुनता रहा, खुद को ताने बुनता रहा। अब मैं खुद की सुनूंगा, और यही ठानूंगा, अब हार नही मानूंगा।। गलतियां पे गलतियां करता रहा, अपनी हार पर,खुद को हारता रहा। अब कुछ भी हो,मैं खुद को ही सुधारूँगा, अब हार नही मानूंगा।। अपने वजूद पर तरस आपने लगी थी , आईने के सामने शरम आने लगी थी। अपना वो चेहरा,अब खुद को नही दिखाऊंगा, अब हार नही मानूँगा।। पल -पल की कीमत पहचानूंगा, खुद की ज़ीनत ,अब बचाऊंगा। अब तक जो भी किया,सब भूल कर, एक नई जिंदगी मैं पाऊँगा।। अब हार नही मानूँगा। अब हार नही मानूँगा।। ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

ग़ज़ल

मछुआरा पानी से डर कर बैठेगा, अँधियारा मुझ में घर कर बैठेगा? मैं हवा, ठहरा, तो क्या रुक गया, अपने घर तूफ़ां भी आकर बैठेगा। छोटी मोटी पतवारों को क्या छेड़ें, ये हाँथ जहाँ बैठेगा जम कर बैठेगा। कुर्सियाँ बिकती हैं खरीद सकते हो, मग़र जो बैठेगा इज़ाज़त लेकर बैठेगा। ग़ज़ल लिखी जाती है ऐसे माहौल में, तू पढ़ने बैठेगा तो संभलकर बैठेगा।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

मन का नियंत्रण

मन को नियंत्रित करना क्यों आवश्यक है। आज प्रत्येक व्यक्ति की समस्या है कि मन हमेशा भटकता रहता है, मन नही लगता, या मन दुखी सा रहता है। कई लोग कोशिश करते हैं कि मन को नियंत्रित कैसे करें! पर वो मन को नियंत्रित करने का व्यर्थ ही प्रयास करते हैं। इस विषय में गीता में भगवान समझाते हैं कि मन इतना चंचल है कि इसे रोकना असम्भव है और इसकी गति को रोकने का व्यर्थ प्रयास भी नही करना चाहिए।ये और दुष्परिणाम कारक हो सकता है। फिर करें क्या! मन हमारे शरीर रूपी वाहन का सारथी समान है। अतः मन को रोकने की नही उचित दिशा दिखाने की आवश्यकता होती है। गीता में एक श्लोक का अर्थ है कि इंद्रियों को मन के द्वारा, मन को बुद्धि के द्वारा, बुद्धि को आत्मा के द्वारा, और आत्मा को परमब्रह्म परमेश्वर के द्वारा नियंत्रित करना चाहिए। इसलिए अपनी आत्मा को परमात्मा को सौप दें तो सारी व्यथा स्वतः ही समाप्त हो जाये। - अमन मिश्रा

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

आध्यात्मवाद

आध्यात्मवाद:- "अहं ब्रह्माष्मि" मैं ब्रह्म हूँ, अतः मैं रचना कर सकता हूँ। जब मैं स्वयं रचना करने योग्य हूँ, फिर क्यों स्वयं के अस्तित्व को भूल जाता हूँ और बाहरी दुनिया के आकर्षण और चकाचौंध में ग़ुम हो जाता हूँ। आध्यात्म अर्थात 'आत्म' का अध्ययन या स्वयं का अध्ययन। वेदों में भी कहा गया है कि सम्पूर्ण ज्ञान स्वयं में ही समाहित है, सिर्फ जरूरत है तो उसके तलाश की। जितने भी आध्यात्मिक पुरुष हुए हैं चाहे बुद्ध, गांधी,विवेकानंद, ईशा, या मुहम्मद सब को तत्वज्ञान अंतः से ही हुआ। इसका मतलब ये नही होता कि हम बाहरी दुनिया से वैराग्य कर ले, बल्कि स्वयं के आध्यात्मिक प्रकाश से सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करें। इस दायित्व का निर्वाह करें। - अमन मिश्रा

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Kiran
Kiran 28 Jul, 2019 | 1 min read

Dowry system

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Raghav Sen
Raghav Sen 24 Jul, 2019 | 2 mins read

Child labour

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