chandra mohan katyal

chandramohankatyal

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में 73+ वर्ष का ग्रेटर नॉएडा, उत्तर प्रदेश, भारत का निवासी हूँ | में नवाबों के शहर लखनऊ में जन्मा एक लखनवी हूँ | माता पिता पाकिस्तान के झंग जिले से थे जो भारत के विभाजन में लखनऊ आ बसे | मैं एक विधि स्नातक हूँ और एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए 2012 में सेवानिवृत हुआ | में कविता लेखन में रुचि रखता हूँ और हिंदी में कवितायें लिखता हूँ | लिखने का शौक बचपन से है | पूर्व में मैंने अपनी रचनाओं को फेसबुक (https://www.facebook.com/chandramohankatyal), ट्विटर (https://x.com/cmkatyal), यू ट्यूब (https://www.youtube.com/@chandramohankatyal8882) इत्यादि सोशल प्लैटफॉर्म्स पर प्रकाशित किया है | अपनी संवेदनाओं को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त करने की कोशिश करता हूँ | यदि इन रचनाओं में पाठक अपने जीवन का कोई अंश, कोई अनुभूति या कोई प्रश्न पहचान सकें, तो मैं अपने प्रयास को सार्थक मानूँगा। ✍️ ༄ चन्द्र मोहन कत्याल ༄ कवी • लेखक ग्रेटर नॉएडा, उत्तर प्रदेश-201310, भारत ईमेल : katyalchandra@gmail.com #ChandraMohanKatyal, #HindiPoetry, #हिंदीकविता

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chandra mohan katyal 07 Oct, 2026 | 1 min read

तू है यहीं कहीं

जब मुहब्बत रूहानी हो तो जिस्मानी गैरमौजूदगी कुछ मायने नहीं रखती | इसी मनोभाव को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |

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chandra mohan katyal 15 Sep, 2026 | 1 min read

सरहद मेरे मन की

प्रेम में असफलता स्वीकारने को हार नहीं कहना चाहिए बल्कि उस ऊपर वाले की मर्जी के आगे समर्पण करने जैसा मानना चाहिए | इन्हीं भावनाओं को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ जिसमें ईश्वर की मर्जी के आगे एक समर्पित प्रेमी, अपनी जिद में डूबी हुई प्रेमिका से निवेदन कर रहा है |

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chandra mohan katyal 04 Sep, 2026 | 1 min read

बरसों बीते छत पे सोये

आधुनिकता और तेजी से बदलते समय की अनवरत चाल ने हमारी ज़िंदगी में क्या कुछ बदल दिया … इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ

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chandra mohan katyal 31 Aug, 2026 | 1 min read

तुम मत डरना

असुरक्षा की भावना मन में भय उत्पन्न करती है | मन से भय कैसे मिटे | इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ

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chandra mohan katyal 24 Aug, 2026 | 1 min read

इस राखी पर

राखी के त्यौहार पर एक बहन अपने भाई को... अपने मन में दबे हुए भावों को प्रकट करती है ... इस एहसास को कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ |

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chandra mohan katyal 19 Aug, 2026 | 1 min read

अच्छे लगते हैं

आज की भागदौड़ और आडम्बरी ज़िंदगी में एक दिली अपनापन, मेलजोल, हंसी ठट्ठा ... ये सब दुर्लभ वस्तुएं हो गई हैं | इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |

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chandra mohan katyal 08 Aug, 2026 | 1 min read

वो लम्हें

वक़्त की तेज रफ़्तार के साथ … हमारी ज़िन्दगी की गाडी इस कदर बिना किसी आवाज के .. बिना किसी आहट के चलती है कि कब आप उम्र के आखिरी पड़ाव पर आ पहुँचते हैं पता ही नहीं चलता …और फिर आपको याद आते हैं… आपके बचपन और आपकी जवानी के वो गुजरे हुए.. खूबसूरत लम्हें | इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ

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chandra mohan katyal 05 Aug, 2026 | 1 min read

ज़िंदा जीने को

मैं मानता हूँ कि ज़िंदगी में ये मायने नहीं रखता कि मैंने कितनी साँसें लीं | मायने ये रखता है कि मैंने कितनी साँसों में ज़िंदगी को जिया | इसी एहसास के साथ कुछ स्वरचित पंक्तियाँ आपसे साझा कर रहा हूँ |

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chandra mohan katyal 04 Aug, 2026 | 0 mins read

अहा

किसी ने शायद यूँ ही नहीं कहा है—"बदनाम होंगे तो क्या … नाम तो होगा!" आज के दौर में यह कहावत कुछ अधिक ही सच होती दिखाई देती है। हल्के-से व्यंग्य के साथ अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियाँ आपके साथ साझा कर रहा हूँ।

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chandra mohan katyal 04 Aug, 2026 | 1 min read

कुछ तो गड़बड़ है

कभी किसी दृश्य को देखते ही पहली ही नज़र में आपका मन कहता है कि … सब कुछ ठीक नहीं है … दाल में कुछ काला है … कुछ तो गड़बड़ है। इसी एहसास के साथ कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

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