प्रेरणादायक विचारों का संसार

अति प्रेरणादायक विचार

Kumar Sandeep
17 Aug, 2026 • 1 min read min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 45

61) समय रहते संभल जाने से भविष्य में आने वाली कई मुश्किलें हमसे कोसों दूर रहती हैं।


62) समय को अनमोल निधि समझने वाले भविष्य में विशेष निधि अपने जीवन में अर्जित कर पाते हैं।


63) नन्ही चींटी भी बड़ी सीख देती है कि चैन सुकून से मत रहो, कदम आगे बढ़ाते रहो, जब तक है तन में प्राण मत करो विश्राम।64) पिता का हृदय कठोर नहीं अति कोमल होता है, पुत्र की आँखों से निकलने वाले आँसू पिता को तोड़ देता है अंतस तक।


65) धनी बन जाने पर आज की युवा पीढ़ी अपने ही पिता को अपने घर के बड़ों को छोटा समझने लगते हैं, परंतु गुण यह होना चाहिए कि धन से अथवा विविध माध्यम से हम कितने भी समृद्ध क्यों ना बन जाएं पर हमें बड़ों के सामने बड़ा बनने की कोशिश नहीं करनी चाहि66) महानता किसी के सामने ख़ुद के धन का प्रदशर्न करने में नहीं बल्कि ख़ुद के संस्कार का दर्शन कराने में है।67) बदलते दौर में भी यदि आपको अपने माँ-पापा की बातें बुरी नहीं लगती हैं, शिक्षक के सुझाव यदि आपको अंदर तक चुभते नहीं हैं, इसका मतलब है कि केवल आप ही जिंदा नहीं हैं, बल्कि आपके अंदर संस्कार भी जिंदा है, जो एक दिन आपको एक अनमोल शख्सियत के रुप में स्थापित करेगा।


68) रावण दहन वर्ष में एक दिन करने से उत्तम कार्य यह है कि हम हर दिन अपने अंदर के रावण को प्रातःकाल दहन करके पूरे दिन भर के कार्य को पूरी ईमानदारी से करें ताकि वर्ष भर में हम अथाव यश अर्जित कर पाने में सक्षम हो सकें।


69) अहंकार रुपी रावण को मन से निकालकर त्वरित दहन कर देना, दशहरे के पर्व के दिन रावण के पुतले को जलाने से उत्तम कार्य है।


70) जीवन का डगर आसान होगा निश्चित ही, यदि हम अपने उर में रोज़ भरेंगे अथाव आत्मविश्वास, जलाएंगे जब हम अपने अंतर्मन में हौंसले के अनेक दीपक।





0 likes
☕

Support Kumar Sandeep

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Kumar Sandeep
Published By

Kumar Sandeep

@Kumar_Sandeep

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

पंचम स्कंदमाता

नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता का ध्यान

1 1
Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

कूष्मांडेति चतुर्थकम्

नवरात्र का चौथा दिन, कूष्माण्डा मां का स्वरूप और अनाहत चक्र पर ध्यान।

1 1
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0