प्रेरणादायक विचारों का संसार

अति प्रेरणादायक विचार

Kumar Sandeep
17 Aug, 2026 • 1 min read min read • hi
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81)वृद्धावस्था में बचपन लौट आता है। माता-पिता भूल जाते हैं घर में रखे हुए सामान का वास्तविक पता। माता-पिता चिल्लाते हैं, छोटी-छोटीसी बातों पर। पर उनके ऐसा करने से हमें परेशान नहीं होना चाहिए बल्कि उनका उचित सम्मान करना चाहिए। क्योंकि एक दिन हम भी उस पड़ाव तक पहुंचेंगे जिस पड़ाव में आज वह हैं।


82) पाँवों में जब छाले होंगे, जब तन तपेगा धूप में, ठिठुरेगा ठंड में तभी तो हम बनेंगे एक दिन बहादुर इंसान जिसे लगेगा हरेक काम बहुत आसान।

83) वृद्धावस्था में ही संतान की वास्तविक परख होती है। वृद्धावस्था में ही संतान की नज़रें यह बताती हैं कि हम उसके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।84) मजबूत इरादों के संग जब कोई भरता है हौंसले की उड़ान, छू लेता है एक दिन तब वह सफलता का आसमान। 

85) एक समय था जब किसी ग़लती पर सामने से आकर माफ़ी माँग लिया जाता था, कि मुझसे ग़लती हो गई जो भी मैंने किया। और ऐसा करने से टूटने वाले रिश्ते भी हमेशा के लिए जुड़ जाते थे। पर बदलते परिवेश में माफ़ी माँगने का गुण ही लोग भूल गए। सभी स्वयं को श्रेष्ठ सही समझते हैं। नतीजा हर रिश्तों में दरार देखा जा रहा86) आपकी सफलता की चर्चा, आपकी सफलता का प्रचार-प्रसार लोग करें या न करें पर आप असफल हो जाइए आपकी असफलता का प्रचार-प्रसार काफी धूमधाम से किया जाता है लोगों के द्वारा। बैरहाल कभी-कभी जीवन में असफलता का फल भी चखना चाहिए ताकि हम ख़ुद से सीख सकें और दूसरों के अंदर हमारे प्रति कितना प्रेम है यह भी जान सकें।87) मैं नए जमाने की पुरानी ख्यालात वाला एक साधारण कोचिंग शिक्षक हूं, मुझे वैसे बच्चे अच्छे नहीं लगते हैं जो अपने अभिभावक के दर्द, तकलीफ, संघर्ष से वास्ता नहीं रखते हैं, जो अपने पैरेंट्स की इज्ज़त को एक किनारे रखकर केवल अपने मन की करते हैं। मुझे वैसे बच्चे अति प्रिय लगते हैं जिनकी नज़र में हर क्षण यह बात चलती है कि मेरे लिए ज़िम्मेदारी विशेष है, और मैं एक दिन अपने परिवार को बेहतर भविष्य दूंगा। मुझे वैसे बच्चे बहुत पसंद हैं, जो मेरा सम्मान करें या न करें पर अपने पैरेंट्स को भगवान से पहले मान-सम्मान और आदर करें।

88) जो टीचर्स आपकी कमियों को आपके अभिभावकों को बताते हैं। जो टीचर्स आपकी की गई ग़लती के लिए आपको डांटते हैं, ऐसे टीचर्स का आपके साथ आपके परिवारवालों के साथ जमीन जायदाद या किसी अन्य संपत्ति का विवाद नहीं होता है। ऐसे टीचर्स अपने परिवारवालों की तरह हमें मानते हैं इसलिए हमें डांटते हैं, हमारी शिकायतें करते हैं। ऐसे टीचर्स चाहते हैं कि हम उनसे भी आगे जाएं खूब तरक्की करें।

89) शिक्षक इसलिए नहीं डांटते हैं कि डांटने से उन्हें सुख मिलता है। शिक्षक इसलिए नहीं पनिशमेंट देते हैं कि उनको पनिशमेंट देने से सुख मिलता है। शिक्षक इसलिए नहीं कहते कि तुम नहीं सुधरोगे कभी, ऐसी बात नहीं कि वो हमें सुधरते हुए नहीं देखना चाहते हैं। शिक्षक इसलिए कहते हैं ताकि हमारे कदम ग़लत राह पर न जाए। शिक्षक इसलिए डांटते हैं, समझाते  हैं, पनिशमेंट देते हैं, ताकि हम संस्कार की सीमा में रहकर, मेहनत की भट्ठी में तपकर एक दिन परिवार की समाज की पहचान बन सकें। 

90) समाज की परिवार की एक अलग पहचान हम एक दिन बन सके इसलिए हमें तपना होता है, हमें गलना होता है, हमें ख़ुद की ख्वाहिशों की आहुति देनी पड़ती है।








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