ग़ज़ल
कवि की कल्पनात्मकता में नायक इस कोरोना संकट में नायिका से दूर अपने जज्बातों का उल्लेख कर रहा
रक्षाबंधन और कोरोना।
रक्षा का बंधन का सही मायने में मतलब अब कोरोना महामारी के दौरान पता चलेगा।
देश को जन धन की तर्ज पर अनाज बैंक की जरूरत
जमाखोरो पर लगाम के लिए जन धन तर्ज पर आवंटन की जाय।
✍ खुशियों के लिए दौलत नहीं प्यार ज़रूरी है।
खुशियों के लिए दौलत ज़रूरी नहीं प्यार ज़रूरी है दिखावा ज़रूरी नहीं दिल का मिलना ज़रूरी है।
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