Kusum Pareek
22 Jun, 2020 | 1 min read
Shah طالب अहमद
21 Jun, 2020 | 0 mins read
रिश्तों की नोकझोंक।...
इल्ज़ाम के दौर में एहतराम किसे पसंद आता है। मज़ाक की हद रखें , कम अग़र सब्र का माद्दा है। गिरेबान में खुद के कहाँ किसी ने झांका है। गलतियों की फेहरिस्त में खुदको सबने कम आंका है। अपनी और अपनों की गलती में,होता अपना ही घाटा है। ऐसे हालातों में रिश्ता तो रहता है ,मगर भरोसा टूट जाता है।
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Ektakocharrelan
21 Jun, 2020 | 1 min read
Ektakocharrelan
21 Jun, 2020 | 1 min read
बाबा
तेरे आशीर्वाद से ज्यादा न कुछ चाहूँ,तुम्हीं जमीं तुम्हीं आसमां बाबा।
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Ektakocharrelan
21 Jun, 2020 | 1 min read
पापा मुझे बड़ा नहीं बनना
पापा मुझे बड़ा नहीं बनना छोटी हूं छोटी ही रहने दो मुझे बड़ा नहीं बनना
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Kumar Sandeep
21 Jun, 2020 | 1 min read
जन्मदाता पिता अपनी संतान के लिए सर्वस्व न्योछावर करता है
पिता अपना सर्वस्व बच्चे के बेहतर कल के लिए समर्पित करते हैं। पढ़िये एक प्रेरणादायक आलेख।
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