How HR Teams Can Create a Positive Workplace Culture in 2026
A positive workplace culture can influence how employees communicate, collaborate, develop their skills, and contribute to organizational goals. In 2026, HR teams are increasingly focusing on creating workplaces where employees feel respected, supported, informed, and connected to their work.
#HR
Life
Life is a long journey, and most of us spend it chasing what we lack, while forgetting to be grateful for what we already hold.
अंतर्राष्ट्रीय स्कूल
कहानी का संदर्भ शिक्षा के बढ़ते व्यापारिक स्वरूप से है | किस प्रकार शिक्षा दान के स्थान पर व्यापार बन कर विद्यालयों की गुणवत्ता गिरती जा रही है, इस समस्या का जिक्र कहानी में व्यंगात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है |
#sarcasm #Education
कहानी का शीर्षक: "मिट्टी के साथी"
"मिट्टी और मनुष्य" एक मार्मिक कहानी है जो शहरी जीवन की भागदौड़ और प्रकृति से अलगाव के बीच, मिट्टी और उसके सबसे छोटे जीवों — केंचुओं — के महत्व को दर्शाती है। कहानी फ़ज़ल एसाफ नाम के एक युवा, संस्कारी किसान के बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी गाँव की मिट्टी और उसके अनदेखे नायकों के प्रति गहरी समझ रखता है। कहानी की शुरुआत ठाणे के एक छोटे से कस्बे में बारिश के बाद की सुबह से होती है, जहाँ फ़ज़ल सड़क पर रेंगते केंचुओं को देखकर विचलित हो जाता है, क्योंकि लोग उन्हें बिना सोचे-समझे कुचल रहे हैं। वह एक केंचुए को उठाकर सुरक्षित स्थान पर रखता है और मन ही मन बुदबुदाता है कि लोग इस "कीड़े" की अहमियत नहीं समझते, जबकि यही उनकी "रोटियों" से जुड़ा है। आगे चलकर, फ़ज़ल का सामना तीन अलग-अलग राहगीरों से होता है: एक तेज़-तर्रार कॉर्पोरेट महिला, अदिति मैडम; एक अनुभवी बुज़ुर्ग, शास्त्री जी; और एक नन्हा लड़का, आर्यन। सबसे पहले, अदिति मैडम अनजाने में एक केंचुए को कुचल देती हैं। फ़ज़ल उन्हें रोकता है और विनम्रता से समझाता है कि यह "कीड़ा" नहीं, बल्कि "किसान का दोस्त" है जो मिट्टी को साँस देता है और ज़मीन को उपजाऊ बनाता है। अदिति शुरुआत में झिझकती हैं, लेकिन फ़ज़ल के शब्दों में छिपी सच्चाई उन्हें सोचने पर मजबूर कर देती है। इसके बाद, शास्त्री जी फ़ज़ल की बात का समर्थन करते हैं और अपने पुराने दिनों को याद करते हैं जब केंचुए को खेत में देखना अच्छी फसल का संकेत माना जाता था। वे आधुनिक समाज में मिट्टी से बढ़ती दूरी पर चिंता व्यक्त करते हैं। फ़ज़ल उन्हें समझाता है कि लोग मिट्टी को गंदगी समझते हैं, जबकि वही "गंदगी" उनकी थाली में गेहूं बनकर आती है, और केंचुए ही बिना किसी स्वार्थ के ज़मीन को जोतते हैं। कहानी में एक मार्मिक मोड़ तब आता है जब आर्यन, एक छोटा लड़का, केंचुए को "साँप जैसा कुछ" समझता है। फ़ज़ल धैर्य से उसे बताता है कि यह एक अर्थवर्म है जो मिट्टी को अंदर से जोतता है, हवा, पानी और बीज को पनपने में मदद करता है। वह आर्यन को समझाता है कि वह जो सब्ज़ियाँ खाता है, वे कहीं न कहीं केंचुए के कारण ही उगती हैं, जिससे आर्यन केंचुए को अपना दोस्त समझने लगता है। आर्यन की माँ भी इस छोटे लेकिन गहरे सबक के लिए फ़ज़ल को धन्यवाद देती हैं। एक छोटी सभा में, फ़ज़ल अदिति, शास्त्री जी और आर्यन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि भले ही वे शहर में रहते हों और वह गाँव से हो, लेकिन "मिट्टी" ही वह धागा है जो उन सबको जोड़ता है। वह शहरी लोगों से मिट्टी के प्रति संवेदना रखने और छोटे जीवों को बचाने की अपील करता है। शास्त्री जी भावुक होकर कहते हैं कि जो समाज ज़मीन से रिश्ता तोड़ता है, वह रिश्तों की अहमियत भी भूल जाता है। कहानी का चरमोत्कर्ष तब आता है जब फ़ज़ल अपने झोले से एक मुट्ठी मिट्टी उठाता है जिसमें एक केंचुआ रेंग रहा होता है। वह भावनात्मक स्वर में समझाता है कि यह मिट्टी केवल मिट्टी नहीं, बल्कि "जीवन" है, जिसमें "मेहनत" और "उम्मीद" है। वह चेतावनी देता है कि जिस दिन केंचुए कम हुए, उस दिन रोटी भी महंगी हो जाएगी, मिट्टी बंजर हो जाएगी, और दिल भी। यह सुनकर आर्यन अब हर केंचुए को ध्यान से देखता है और वादा करता है कि वह उन्हें कुचलेगा नहीं। कहानी एक शक्तिशाली मोनोलॉग के साथ समाप्त होती है, जिसमें फ़ज़ल की आवाज़ बताती है कि शहर भले ही चमकता हो, लेकिन उसकी नींव वही मिट्टी है जो गाँवों में साँस लेती है। वह जोर देता है कि अगर हम मिट्टी को मारते रहेंगे, तो हम भी धीरे-धीरे मरेंगे, "बिना आवाज़ के, बिना मिट्टी के।" अंतिम पंक्तियाँ एक काव्यात्मक संदेश देती हैं: "जो रेंगता है ज़मीन पर, वो थामे है आसमान को। न कुचलिए उसे, क्योंकि वो पालता है हमें… चुपचाप।" संदेश: यह पटकथा एक सरल लेकिन गहन संदेश देती है: "ज़मीन पर चलिए, मगर ज़मीन को समझकर चलिए। क्योंकि वहीं से जीवन उगता है।" यह कहानी हमें प्रकृति के सबसे छोटे सदस्यों के महत्व को पहचानने और उसके साथ हमारे संबंध को फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।
#Earthworm farmers friend #look before you walk #Earthworm soil friend
हिजाब वाली लड़की
कहानी का विस्तृत सारांश यह कहानी आयशा नाम की एक युवा मुस्लिम छात्रा के बारे में है जो मुंबई के एक आधुनिक कॉलेज में हिजाब पहनकर आती है, लेकिन उसे अपने पहनावे के कारण सहपाठियों के उपहास और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है। शुरुआत में आयशा इन टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ करती है, लेकिन एक दिन कैंटीन में कुछ छात्रों द्वारा उसके हिजाब और उसकी बौद्धिक क्षमता को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी उसे बोलने पर मजबूर कर देती है। आयशा बड़े ही शांत और दृढ़ स्वर में उन छात्रों को चुनौती देती है। वह सवाल करती है कि क्या हिजाब पहनने से "न्यूरॉन्स" काम करना बंद कर देते हैं और क्या विज्ञान में ऐसा कोई प्रमाण है जो यह बताता हो कि कपड़ों का एक टुकड़ा सोचने की क्षमता को प्रभावित करता है। वह स्पष्ट करती है कि हिजाब उसकी आस्था का प्रतीक है और इसे पहनकर वह सुरक्षित और सहज महसूस करती है। आयशा के सवाल केवल उसके व्यक्तिगत अनुभव तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वे समाज के सामने व्यापक प्रश्न उठाते हैं। वह पूछती है कि यदि एक महिला अपने चुने हुए परिधान में सहज महसूस करती है तो दूसरों को इसमें क्या समस्या होनी चाहिए। वह आज़ादी के सही अर्थ पर प्रकाश डालती है, जो न केवल अपनी पसंद को व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, बल्कि दूसरों की पसंद का सम्मान करने की भी। वह इस बात पर जोर देती है कि लोगों को उनके कपड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके विचारों और गुणों के आधार पर आंका जाना चाहिए। आयशा के सवालों से कॉलेज के छात्र शर्मिंदा होते हैं और उसके प्रति उनका नज़रिया बदलता है। कुछ छात्र उससे माफ़ी भी माँगते हैं। आयशा का यह कार्य न केवल उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है बल्कि यह भी साबित करता है कि अज्ञानता और पूर्वाग्रह को समझ और सम्मान से ही हराया जा सकता है। कहानी इस बात पर ज़ोर देती है कि आयशा एक मेधावी छात्रा थी और हिजाब उसकी बौद्धिक क्षमता या पहचान के आड़े कभी नहीं आया।
एक मुस्लिम गरीब लड़के की कहानी जो पढ़ना चाहता है
यह कहानी रहीम नाम के एक गरीब और मेहनती मुस्लिम लड़के की है, जिसके जीवन में कम उम्र में ही मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ता है। जब वह सिर्फ तीन साल का था, तभी उसके अब्बा का इंतकाल हो जाता है, और घर की सारी ज़िम्मेदारी उसकी अम्मी, सकीना, पर आ जाती है। सकीना दूसरों के घरों में मेड का काम करती है, लेकिन उसकी कमाई इतनी कम होती है कि दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से मिलती है, और रहीम को स्कूल भेजने का सपना अधूरा रह जाता है। इसके बावजूद, रहीम के अंदर पढ़ने की गहरी लगन है। उसकी आँखें ज्ञान की दुनिया को देखने का सपना देखती हैं और वह अपनी अम्मी को गरीबी और दूसरों के घरों में काम करने की मजबूरी से आज़ाद कराना चाहता है। अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए, रहीम छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर देता है। वह शहर की एक छोटी सी परचून की दुकान पर दिन भर ईमानदारी और लगन से काम करता है। शाम होते ही, रहीम अपनी थकान को दरकिनार करते हुए पास के 'शाम के मदरसे' में पढ़ने चला जाता है, जहाँ गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। मदरसे से लौटने के बाद भी वह अपनी अम्मी की मदद करता है, घर के कामों में हाथ बँटाता है। रविवार का दिन उनके लिए खास होता है, जब रहीम अपनी अम्मी से अपने बड़े-बड़े सपने साझा करता है – खूब पढ़कर बड़ा आदमी बनना और अम्मी को आराम भरी ज़िंदगी देना। कहानी इस बात पर भी जोर देती है कि कैसे रहीम अपनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अच्छी आदतों को बनाए रखता है। जहाँ उसके आस-पास के कई लड़के गरीबी से हार मानकर गलत रास्तों पर चले जाते हैं, वहीं रहीम न केवल खुद ईमानदार और नेक रहता है, बल्कि अपने दोस्तों और पड़ोस के लड़कों को भी पढ़ाई की अहमियत समझाता है और उन्हें सही रास्ता दिखाता है। वह उन्हें बताता है कि शिक्षा ही गरीबी से निकलने का एकमात्र ज़रिया है, न कि बुरे काम। यह कहानी मेहनत, लगन और नैतिक मूल्यों का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास से कोई भी व्यक्ति अपनी मुश्किलों को पार कर सकता है।
छज्जे पे टंगी दुआएँ
यह कहानी मुम्ब्रा की एक तंग बस्ती में रहने वाली नज़मा और उसकी बेटी हिना की है। नज़मा घरेलू काम कर के अपनी बेटी की पढ़ाई का ख़र्च उठाती है, क्योंकि वह चाहती है कि हिना डॉक्टर बने। मोहल्ले के लोग हिना की पढ़ाई का मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन माँ-बेटी हार नहीं मानतीं। हिना स्कूल के बाद एक NGO सेंटर में पढ़ती है और मेडिकल कैंप में वॉलंटियर बनती है। माँ की छज्जे पर टांगी दुआएँ उसकी किताबों की तरह हर दिन उम्मीदों के साथ लहराती हैं। स्कॉलरशिप के इंटरव्यू के लिए हिना वही पुरानी यूनिफॉर्म पहनती है लेकिन हिम्मत नई होती है। अंततः उसे स्कॉलरशिप मिलती है और मुम्ब्रा की उस गली में एक नई रौशनी फैलती है—उम्मीद की।
#Education,community
अब्बू का सपना
इम्तियाज़ मियाँ, लखनऊ के एक मामूली फिटर, ने अपने बच्चों को सिविल सेवा में भेजने का सपना देखा। उन्होंने अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया। बच्चों ने कठिन संघर्ष के बाद IAS, IPS और IRS में सफलता प्राप्त की। यह सफलता पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा बनी और शिक्षा के प्रति नजरिया बदला। कहानी इस्लाम में मेहनत, ईमानदारी और शिक्षा के महत्व को उजागर करती है। यह मुस्लिम युवाओं को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वे अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर रहे हैं। यह कहानी बताती है कि सीमित साधनों के बावजूद, मजबूत इरादा हर सपना साकार कर सकता है।
Moeen Aftab : Elected as MP in the UNESCO’s World Teen Parliament
Moeen Aftab from Radiant Public School has successfully been elected as the Member of the Parliament (MP) in the 3rd World Teen Parliament. He was elected on 20 January 2024. About Moeen Aftab: Moeen Aftab (born, 26 October 2011) is a student (9th, 2024), public speaker, author, poet, novelist, columnist & Member of Parliament (MP) of the UNESCO’s World Teen Parliament. He was born in the Anantnag district of J&K. He is the Youngest Columnist from the UT, J&K. His columns have been published in famous news portals like; The Times Of India, Hamari Aawaz, Greater Kashmir, Daily Srinagar-e-Jang etc. He is currently a student at Radiant Public School, Batengoo Anantnag Kashmir. He got into the world of literature and started his journey with an anthology in 2021 (studying in class 6th). He has Co-authored 23 anthologies including ‘The Ladder Of The World Class Life’, ‘Alliance of writers’, ‘The Heavy Heart’ etc. He authored his first novel in 2022 named ‘The Scared Visitor’. He was also featured in Top 15 Upcoming Talents Of 2023. Besides this, he is an International Level IMUN Speaker, wherein he is an official member of the UN committee. He also participated in IMUN Olympiads 24.0 & phenomenally cracked the Olympiad with 100th percentile getting the 56th International Rank, 4th National Rank & Ist Zonal Rank. Moeen Aftab is a prominent & professional public speaker, he has excelled many national & international level speaking contests like "IMUN Online Conference 163.0", "Y20 Zonal Debate", "Mission LiFE National Level Speech Competition" etc He is also being invited as a guest speaker at many prominent convocation halls like "SKICC SRINAGAR", "TAGORE HALL SRINAGAR", "G&B PULWAMA, "All India Radio Srinagar" etc.
#The Scared Visitor Moeen Aftab #3rd World Teen Parliament #World Teen Parliament #Moeen Aftab
श्री कृष्ण पर केस॥ किसने किया श्री कृष्ण पर केश अर किउ।
श्री कृष्ण पर केस करने वाले के साथ केया हुया जानकर हेरान हो जायेंगे। किउ इस्कोन को वेन करने मे लगे हे नन।
#Education #Facts #Krishna
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