कितनी परतें हैं इस अनजाने मन की
हमारे मन में कभी-कभी इतना सब चलता रहता है कि हमारा अंतर्मन विचलित होने लगता है ।
##talash
बनने आए थे कालिदास मातृगुप्त बन कर रह गए
महाकवि कालिदास पर आधारित रचना 'आषाढ़ का एक दिन' को बहुत ही कम शब्दों में समझाने की मेरी कोशिश मेरे शब्दों में मल्लिका- कालिदास की प्रेमिका अम्बिका- मल्लिका की माँ विलोम- मल्लिका का पति प प्रियंगु मंजरी- कालिदास की पत्नी मातृगुप्त- शासक बनने पर कालिदास का नाम
आज़ादी अभी बाकी है...
कहने को तो आज़ाद हैं हम, पर आज़ादी अभी बाकी है, ये मैं नहीं इस देश की बेटियाँ बताती हैं ।
##let's start
ठिठुरन भरी ठंड
मौसम तो प्रकृती का व्यवहार है । प्रकृती हमेशा से ही कलम को गति देने वाला विषय रहा है। हम सब जानते हैं कि मौसम में बदलाव के वैज्ञानिक कारण होते हैं परंतु कलम उसका मानवीकरण कर उसके साथ अठखेलियां करती है ।
मुठ्ठी भर आशाएँ
अक्सर सभी ने सुना होगा कि आपको आपसे बेहतर कोई नहीं जानता ,इसीलिए अपनी क्षमताएं पहचानिए और हर रोज़ आगे बड़ते रहिए ।
दिल और दिमाग
यहाँ दिल और दिमाग के जैविक पहलु पर ध्यान ना देते हुए बस दोनों का भावनात्मक संवाद हुआ है ।