मर्दानी 2 teaser release

मर्दानी 1 की सफलता के बाद आ रही है मर्दानी 2 जिसमें रानी मुखर्जी दुर्गा अवतार में दिखाई देंगी

Sushma Tiwari
10 Oct, 2019 • 1 min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 994
मर्दानी 2 teaser release


2014 में रिलीज हुई फिल्म मर्दानी का सीक्वल है मर्दानी-2 जिसमें अपने किरदार पर रानी मुखर्जी बता रही है फिल्म में है उनका मां दुर्गा का अवतार! है ना इंट्रेस्टिंग?

फिल्म में पुलिस ऑफिसर शिवाल शिवाजी रॉय का किरदार निभा रहीं रानी मुखर्जी इस बात को लेकर खुश हैं कि फिल्म का फर्स्ट लुक नवरात्रि के दौरान जारी हुई हैं।

रानी मुखर्जी इस फिल्म को लेकर काफी खुश है क्यूँकी वो दुर्गा की पूजा करती हैं और इसमे उनका दुर्गा अवतार दिखाया गया है।

यह फिल्म 2014 में रिलीज हुई फिल्म मर्दानी का सीक्वल है, जिसे प्रदीप सरकार ने निर्देशित किया था। इस फिल्म के लेखक और डायरेक्टर गोपी पुथरन हैं।


समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध और उनके संघर्षों के खिलाफ पुलिस अधिकारी शिवानी रॉय की जंग को फिल्म में दिखाया जाएगा। हाल ही में फिल्म का करीब 38 मिनट का टीजर जारी हुआ है, जिसमें रानी का 'एंग्री यंग वुमन' वाला अंदाज काफी पसंद किया जा रहा है । इस फिल्म रिलीज की तारीख 13 दिसंबर तय की गई है।मर्दानी की सफलता के बाद इस उम्दा विषय पर इसके सीक्वल का इंतजार रहेगा।

0 likes
☕

Support Sushma Tiwari

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Sushma Tiwari
Published By

Sushma Tiwari

@SushmaTiwari

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Fiction
Aarti Kushwah • 15 Sep, 2026 • 1 min read

कितनी परतें हैं इस अनजाने मन की

हमारे मन में कभी-कभी इतना सब चलता रहता है कि हमारा अंतर्मन विचलित होने लगता है ।

109 0
More stories in Fiction
wayne travel log • 31 Dec, 2025 • 1 min read

The goth gouls of horror

fun gothic tale of horror

345 0
More stories in Fiction
Adhiraj • 19 Oct, 2025 • 1 min read

कविता : पर्वतों के पुत्र

साहसी संघर्ष में विचलित नहीं होते |

435 1
More stories in Fiction
fazal Esaf • 12 Jun, 2025 • 1 min read

बिल के उस पार"

सफ़दर अली को लीवर संक्रमण के कारण आईसीयू में भर्ती हुए छह दिन हो चुके थे। उनकी पत्नी ज़ेबा, एक स्कूल टीचर, इलाज के ₹2,83,000 के भारी बिल को देखकर परेशान थी, क्योंकि डॉक्टरों ने अगले दिन तक आईसीयू का भुगतान करने या सफ़दर को जनरल वार्ड में शिफ़्ट करने के लिए कहा था। उसकी मासिक आय इस बिल का एक तिहाई भी नहीं थी। मदद के लिए, ज़ेबा ने सबसे पहले मस्जिद के इमाम साहब को फ़ोन किया, जिन्होंने चंदा इकट्ठा करने का आश्वासन दिया। फिर उसने स्कूल की प्रिंसिपल को कॉल किया, जिन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालने की पेशकश की, लेकिन कोई आधिकारिक मदद नहीं की। उसकी आख़िरी उम्मीद वक़्फ़ बोर्ड की वेबसाइट भी बेकार साबित हुई। अगले दिन, सफ़दर की हालत बिगड़ने पर, डॉक्टर ने बताया कि लीवर ट्रांसप्लांट ज़रूरी है और इसका खर्च लगभग ₹18 लाख होगा। यह सुनकर ज़ेबा पूरी तरह टूट गई। उसे याद आया कि कैसे समाज के लोग दूसरों की मदद करने में उदासीन रहते हैं। कहानी इन सवालों के साथ समाप्त होती है कि क्या मस्जिदें और वक़्फ़ संपत्तियाँ वास्तव में ज़रूरतमंदों के लिए उपलब्ध हैं, क्या मुस्लिम समुदाय ने स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए ठोस व्यवस्थाएँ की हैं, और क्या हम केवल प्रार्थनाओं तक ही सीमित रह गए हैं जब किसी को वास्तविक सहायता की आवश्यकता होती है। यह इस बात पर भी विचार करती है कि क्या समाज में किसी "ज़ेबा" को अकेला छोड़ दिया जाना चाहिए। यह कहानी एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है: "जब कोई बीमार होता है, क्या हम केवल संवेदना भेजते हैं, या समाधान भी?"

587 0