Sandhya chaturvedi
Sandhya chaturvedi 09 Jun, 2020 | 1 min read
मंदिर के पट खोलो

मंदिर के पट खोलो

शीर्षक -मंदिर के पट खोलो मंदिर के पट खोलो गोविंद भक्त खड़े दरवाजे पर पूजा की थाली तुम्हें बुलाती रोरी कुमकुम तुम बिन नही सुहाती। बंद हुए क्यों पट मंदिर के पूछ रही पूजा की थाली। मेरा नैना तरस रहे दर्शन को। तुम बिन कौन सहारा मेरा। दर्शन दे दो हे जगदम्बे तुम बिन जीवन सुना मेरा। रो रही है अँखियाँ संकट में तुम कौन तारन हारा। भक्तो पर कष्ट है भारी माँ जगदम्बे तुम्ही सहारा। पाप बढ़ गया जब धरती पर तुमने शत्रु दल को मारा छोड़ दिया क्यों आज साथ हमारा। इस संकट में तुम बिन कौन सहारा। व्रन्दावन की गलियां सुनी सुनी पड़ी माँ जम्बू कटरा सुने हो गए सब देवालय बंद हुई जब पुरी तुम्हारी। कौन जगाये अब भजन सुना कर कौन उतारे आरती तुम्हारी क्या याद नही तुम को भक्तों की आती। कैसे बेटे से बिन मिले माँ सो जाती। आज धरा पर संकट के बादल मंडराते और बंद पड़े है मंदिर तुम्हारे। संध्या चतुर्वेदी अहमदाबाद, गुजरात

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Neha Srivastava
Neha Srivastava 09 Jun, 2020 | 0 mins read
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Kumar Sandeep
Kumar Sandeep 09 Jun, 2020 | 1 min read

2020 तू क्यूं रुठा है रे!

2020 से कुछ प्रश्न है जो मन में उत्पन्न हुए हैं!

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udit jain
udit jain 09 Jun, 2020 | 1 min read

अब जल के भी पैसे दो।।

कुछ शर्म नही है

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udit jain
udit jain 09 Jun, 2020 | 1 min read

मुझे आश्चर्य है क्योकि

जीवन अपनो ने बदल दिया है

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Prakruthi Jain
Prakruthi Jain 08 Jun, 2020 | 1 min read

The tune of death

A short poem about the inevitable.

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udit jain
udit jain 08 Jun, 2020 | 1 min read

एक मजदूर

किसान हूँ भारत का मै

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Saket Ranjan Shukla
Saket Ranjan Shukla 08 Jun, 2020 | 1 min read

क्या करूँ

क्या करूँ

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