Anita Bhardwaj
03 Dec, 2020 | 1 min read
Shubhangani Sharma
02 Dec, 2020 | 0 mins read
Shubhangani Sharma
02 Dec, 2020 | 0 mins read
Shubhangani Sharma
02 Dec, 2020 | 1 min read
Sonnu Lamba
02 Dec, 2020 | 1 min read
माटी पुत्र
किसान के मन के हर्ष और विषाद..कितने बेसिक होते हैं, महसूस किजीए... हालांकि इस कविता में वर्तमान बिल का कोई जिक्र नही है, ये आम दिनो की व्यथा है, कोन्टेस्ट में, मैं लिख चुकी हूं, ये मेरी दूसरी रचना है, जिसको राजनिति से इतर रखा है..! पढिए जरूर..!
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Saket Ranjan Shukla
01 Dec, 2020 | 1 min read
वक़्त अपना, ख़ुद बदलो
जीत तुम्हारी है अगर तुम चाह लो
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Shubhangani Sharma
01 Dec, 2020 | 0 mins read
मेरा बुत
मुझे बदलना जो चाहो तो, खुद भी बदल जाना, लेकिन जो बदलने की ज़रूरत हो, तो तुमने मुझे कहाँ जाना।।
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Sonnu Lamba
30 Nov, 2020 | 1 min read
प्रदूषण
ये कविता मैने बीस साल पहले लिखी थी, अगर बीस साल पहले मुझे ऐसा महसूस हो रहा था, तो अब तो स्थिति ही क्या है.. आप सब महसूस करते ही हैं..!
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