Sumita Sharma
Sumita Sharma 01 Sep, 2020 | 1 min read

दहलीज़

Relationship

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Sumita Sharma 07 Aug, 2020 | 1 min read

राम मेरी नज़र से

मेरी नज़रो से राम का अनछुआ पक्ष

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Sumita Sharma 05 Aug, 2020 | 1 min read

सिर्फ सम्मान की चाह

Relationship depends on bonding

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Sumita Sharma 27 Jul, 2020 | 1 min read

माँ के बाद माँ जैसी

Hidden care of wife

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Sumita Sharma 15 Jul, 2020 | 1 min read

खिलौने जो ज़िंदा थे

वर्मा दम्पत्ति बेजान लैपटॉप के आगे घँटों से बैठे थे और कभी नेटवर्क का मामला तो कभी नींद का जोर पर आस थी कि शायद बच्चे ऑनलाइन आ जायें, पर सब व्यर्थ रहा। बरसों से रोज़ यही क्रम बना था,निशा को अक्सर मोहन यही समझाते कि हमारे खिलौने यही दोंनो हैं क्योंकि अपना बचपन तो कागज़ की नाव ,पतंग और कपड़े की गुड़ियों से ही निकल गया। अक्सर दोनों बाजार जाते तो त्योहारों पर  न जाने कितने खिलौने उठा लाते । इस आस में कि शायद  किसी रोज़ उन्हें खेलने वाले आयेंगे ,कभी आते तो उन्हें उन सबमें कोई दिलचस्पी भी न महसूस होती। धीरे धीरे व्यस्तता का अजगर वो पल भी निगल गया बची तो जीवन मे बस एक निस्तब्धता। अब तो त्यौहार भी बस उदासी में निकलने लगे  एक दिन मायूस पत्नी को समझाते हुए मोहन ने कहा ,"निशा क्यों न हम उन्ही खिलौने को बनाये जो हम बचपन मे खेलते थे। एक दो कागज़ की नाव और कपड़े की गुड़िया सुबह की सैर पर किसी कूड़े के ढेर में आजीविका खोज़ते बच्चों में बचपन की चिंगारी चमका देते। अब दोनों का ग़म कुछ छँटने लगा था,त्यौहार पर इस बार बच्चे आये तो दोनों वृद्ध खुश हुए । उन्हें वहीँ बसने के लिए पैसों का बंदोबस्त भी चाहिये था पिता से, उनकी मशीनी ज़िन्दगी और आधुनिक सोच ने ये भरम भी तोड़ दिया कि ,वो उनके बच्चे हैं। जैसे आये थे दोनों बेटे,वैसे ही एक हफ़्ते बाद चले भी गए । पर अब निशा और मोहन को उनके ऑनलाइन आने का इंतजार  न था। थके मन और परेशान दिमाग़ लिए दोनों ने सोना पसन्द किया,अगले दिन सारे खिलौने बटोर कर ले गए अनाथ आश्रम ।उनके इस कदम ने न जाने कितने जीवित खिलौनों में रौनक भर दी थी। बेजान खिलौनों (लैपटॉप और फ़ोन)पर निर्भरता अब कम हो चुकी थी।रोज दोनों वहीं आते और थक कर चैन की नींद सोते। एक दिन पुराना एलबम अलमारी में निकला तो निशा ने यह कहकर उसे ट्रंक में डाल दिया,"कि ये खिलौने कभी ज़िंदा थे ,चलिए अभी अनाथ आश्रम ही चलते हैं। अब खिलौने और खेलने वालों के किरदार बदल चुके थे।

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Sumita Sharma 08 Jul, 2020 | 1 min read

आप क्या जानो स्टैंडर्ड

आप क्या जानो

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Sumita Sharma 27 Jun, 2020 | 1 min read

काश मैंने सोचा होता

ज़िन्दगी खूबसूरत है

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Sumita Sharma 29 May, 2020 | 1 min read
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Sumita Sharma 28 May, 2020 | 1 min read

राज़ उस रात का

डर के आगे ब्यूटी है

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