कागज की कश्तियां

बचपन की यादें

Seema sharma Srijita
25 Jan, 2021 • 1 min read • hi
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कागज की कश्तियां

Photo by Bruno Kelzer on Unsplash

कागज की कश्तियां 


आज भी याद है वो कागज की कश्तियां 

बचपन वाली वो अल्हड़ सी मस्तियां 

बारिश के आते ही खिल खिल जाना 

नंगे पैर दोस्तों संग दौडे़ चले जाना 

खूब खिलखिलाना और खूब मुस्कराना 

बारिश में कागज की कश्तियां चलाना |


नटखट सा मन था, जीवन उपवन था 

हर ओर हरियाली थी और खुशहाली थी 

ना डर था ना नफरत ना जलन ना हीं कपट 

सबसे खूबसूरत था बचपन वाला सफर 

ना मालूम था लौट फिर ना आयेगा जमाना 

बारिश में कागज की कश्तियां चलाना |


मिट्टी में सने पैर लेकर घर में घूम आते थे

 मिलकर सब भाई बहन खूब धूम मचाते थे

 बेफिक्री ,अल्हड़पन था मासूम सा मन था 

उम्र के पडावों में सबसे हसीन बचपन था 

अब जाकर समझ आया है ये फसाना 

बारिश में कागज की कश्तियां चलाना |


सीमा शर्मा पाठक " सृजिता "


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Seema sharma Srijita
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Seema sharma Srijita

@seemasharmapathak

Comments

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  • Sonia Madaan · 5 years ago last edited 5 years ago

    Well penned ?. Kagaz ki kashti Wala samay bhi kitna acha tha

  • Seema sharma Srijita · 5 years ago last edited 5 years ago

    Ji thank you.... Correct

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