आपदाएं disasters

आपदाओं में सदा मानव ने एकजुट होकर मानवता दिखाई।

prem bajaj
27 Sep, 2025 1 min read min read hi
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आपदाएं disasters

Disasters

आपदा इन्सान की तरह भेदभाव नहीं करती




आपदा अर्थात एक गंभीर एवं विनाशकारी घटना जो कि प्राकृतिक आपदा बाढ़, तुफ़ान, सूखा, जंगल आग, भुकंप इत्यादि या मानव-निर्मित दुर्घटना, तकनीकी विफलता, युद्ध एवं खतरनाक सामग्री का रिसाव इत्यादि भी हो सकती है, कुछ मानव-निर्मित आपदाएं दुर्भावना पूर्ण भी होती है जैसे कि आतंकवाद एवं साईबर हमले इत्यादि।

आपदा कैसी भी हो इसमें जान-माल का बहुत नुक्सान होता है एवं जिविका संसाधन पर भी प्रभाव पड़ता है।

इस तरह की अनेकों आपदाओं का सामना किया भारत ने। 1999 में ओडिसा सुपर साइक्लोन, 2001 में गुजरात भुकंप, 2004 में हिन्द महासागर सुनामी, 2013 में केदारनाथ जलप्रलय, 2014 में भूस्खलन, 2024 में चक्रवात जैसे कई आपदाओं से दो-चार हुआ भारत। 

प्राकृतिक आपदा हो या मानव-निर्मित, चाहे इतिहास की घटनाएं हो या वर्तमान की कुछ लोगों को छोड़कर अधिकांश लोग आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने, घायल अवस्था में उपचार एवं जिन लोगों ने कुछ खोया उन लोगों का समर्थन और उन्हें सहारा देने के लिए सब एकजुट होकर सामाजिक एकजुटता का शक्तिशाली प्रदर्शन किया है। 


आपदाएं मनुष्य के जैसे कभी किसी व्यक्ति या समुदाय में भेदभाव नहीं करती वे सब पर एक जैसा प्रभाव डालती हैं। वे प्रकृति के अनुसार घटती है तथा सब पर समभाव से प्रभाव डालती है। लेकिन जब कभी कोई आपदा आती है तो लोग व्यक्तिगत भेदभाव भूलकर सबके प्रति समान भाव रखते हुए करूणा, सहानुभूति और सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर सहायता के लिए कदम उठाते हैं तो आपदाग्रस्त के नुकसान की भरपाई भी जल्दी हो जाती है‌

 2019 के कोरोना काल ने भी यह साबित कर दिया कि किसी भी मुसीबत में मानव जाति एक होकर ही उसका मुकाबला कर सकती है। कोरोना काल में जहां अनेकों जान-माल की हानि हुई है वहां कई दूर हुए रिश्ते भी करीब आए हैं। दूरियां आई परिवारों ने साथ मिलजुल कर रहना सीखा। छोटो को बड़ों का सानिध्य मिला एवं बड़ों को छोटो का अपनापन मिला।

आपदाएं भले ही जान-माल हानि देकर जाती हैं, प्रलयकारी, विनाशकारी होती है मगर इन्सान की इन्सानियत का बहुत बड़ा सबूत भी दे जाती हैं, मानवता की भावना विपरीत परिस्थितियों में विरोधियों को भी एक साथ खड़ा करती हैं। मनुष्य सभी भेदभाव मिटाकर एकजुटता की मिसाल कायम करते हैं।

माना कि अधिकतर प्राकृतिक आपदाएं घटित होती हैं और कुछ मानव-निर्मित। कुछ आपदाएं ऐसी घटित होती है कि जिन पर मानुष का कोई ज़ोर नहीं जैसे कि बादल फटना या बाढ़ आना इत्यादि, लेकिन ऐसी आपदाओं में एकजुट होकर जाति, रंग, वर्ण भेदभाव मिटाकर सब एक-दूसरे की सहायता द्वारा आपदाओं द्वारा होने वाले नुकसानों से बच जाते हैं। 

यदि सावधानी और सूझबूझ से काम लिया जाए तो मानव अधिक सुख-समृद्धिवान बन सकता है। क्योंकि आपदा किसी अमीर या गरीब तथा जाति-धर्म या वर्ण में भेदभाव नहीं करती इसलिए......

 आपदा के समय हमें सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। जिस तरह से कोरोना काल में सरकार द्वारा समय-समय पर लाॅकडाऊन अर्थात पूर्णबंद लगाया गया तब लोगों ने सरकार के नियमों का पालन करते हुए अपने-आप को सुरक्षित महसूस किया।

हमें प्रकृति को नुक्सान नहीं पहुंचाना चाहिए, प्रकृति का सम्मान करना चाहिए इत्यादि। 

यदि मानव भी आपसी भेदभाव मिटाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर एकजुट होकर रहे तो मानव-निर्मित आपदाओं की घटनाओं में अवश्य कमी आएगी। प्रकृति को नुक्सान न पहुंचाने से प्राकृतिक आपदाएं भी अवश्य कम होंगी। मानव की एकजुटता ही मानवता का प्रतीक है।




प्रेम बजाज © ® 

जगाधरी ( यमुनानगर )

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