ARAVIND SHANBHAG, Baleri
14 Aug, 2020 | 1 min read
Shubhangani Sharma
11 Aug, 2020 | 1 min read
मेरा परिवार
मेरी बिटिया ने परिवार के बारे में कुछ लिखने का प्रयास किया। परंतु दो पंक्तियों के बाद बाल मन कुछ और कार्य में व्यस्त हो गया। उम्मीद है कुछ समय बाद उसे ये पंक्तियों को आकार देने का मन करे। अभी के लिए यह अधूरा कार्य हमने कर दिया उसकी ओर से।
3
2
976
Ektakocharrelan
11 Aug, 2020 | 1 min read
मैं अक्सर चुप रहती हूँ
मैं अक्सर चुप रहती हूँ, बोल नहीं पाती कौई अपशब्द। मेरा अंतःकरण पी लेता है, हर दुख हर दर्द खुद ही। अपनों की खातिर सहेजती हूँ घर को , और फिर अधरों पर लाती हूँ मुस्कान
0
2
861
Pragati tripathi
09 Aug, 2020 | 1 min read
बाबुल एक बार मुझे गले से लगा लो
पिता और बेटी के प्यार और टूटते - बिखरते रिश्तों की कहानी।
0
2
1145