उम्मीदें
जब वक्त कठिन हो तो उम्मीद के एक छोर को कस के पकड कर रखना चाहिए..!
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उम्मीदें धुंधला रही हैं
मन रह रहकर घबराता है
उसने कहा !
वो देखो नव अंकुर
प्रत्येक बीज, अथाह घुटन
और सन्नाटें को चीर कर ही
रोशनी की किरण देख पाता है
मैने कहा !
कहना क्या चाहती हो ?
यही कि
घबराहट, संघर्ष, नाउम्मीदी
ये सब भी जीने की निशानियां है !
अब तुमसे कोई कैसे जीते ?
केवल एक ही तरीका है
मेरी बात मान ली जाए
मैंंने कहा !
फिर वो बहुत देर हंसता रहा
उसने कुछ नहीं कहा !
©®sonnu Lamba
Comments
Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓
Nice??
थैंक्यू @नेहा
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