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कंगन
कंगन पहन हो गई मैं मगन। छूने चली हूं मैं तो नील गगन। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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by rekhajain
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03 Jul, 2022
मूल्यवान दौलत
हंसता हुआ परिवार और संतुष्ट घरबार ही सबसे मूल्यवान दौलत है। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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04 Jul, 2022
आंखों में आई नमी
आंखों में आई नमी और उम्मीद में आई कमी इंसान को कमजोर बना देती है यह शाश्वत सत्य है। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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04 Jul, 2022
अंहकार
अंहकार रूपी वृक्ष पर केवल विनाश के ही फल मिलते हैं। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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04 Jul, 2022
दिशा
दिशा दिखाने वाले यदि सही राह दिखायें तो हुई ही तलवार का काम करती है। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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05 Jul, 2022
ऩजर
मस्ती में चूर नज़र मारेगी इस कदर उतरा ना नशा अगर ऩजर ना मिलाना मगर। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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05 Jul, 2022
नज़र
नज़रों के तीर देते कलेजा चीर कैसे धरुं धीर बिंध गया शरीर। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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05 Jul, 2022
नज़र
अपनी नज़र पर गुमान ना कर तेरे आंसू गिरवी रखें है मेरे पास।
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05 Jul, 2022
बारिश
रिमझिम बारिश हुई धरा पर, देख धरा भी मुस्काती नई कोंपलों के स्वागत में, वसुधा भी अब मदमाती। देख घटा घनघोर कोकिला, कुहुकुहु राग आलापे ओढ़ चुनरिया धानी बसुधा,पलपल में फिर इठलाती । डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद स्वरचित वमौलिक रचना
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06 Jul, 2022
वसुधा
इस सावन के मास में बसुधा हो रही उदास। इन बारिश की बूंदों से मिट गयी धरा की प्यास। डॉ रेखा जैन शिकोहाबाद
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by rekhajain
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06 Jul, 2022
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