अन्याय
इन नारों में ना कोई संसद है,
ना कोई दरबार,ये है देश का सच्चा अखबार ,कोई सड़क पर बैठा भूखा-प्यासा,कोई पोस्टर लिए लगा रहा नारा! बारिश, धूप में जान गंवाई ,ये है अपने हक़ की लडाई !इस जन्तर मन्तर में अन्याय के खिलाफ मन्तर बजा है
सच है इन्साफ देर से चलता है ,
पर इनके बैठने से ही समय बदलता है!!
Paperwiff
by preetigupta3