तुम मत डरना

असुरक्षा की भावना मन में भय उत्पन्न करती है | मन से भय कैसे मिटे | इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ

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chandra mohan katyal
chandra mohan katyal 31 Aug, 2026 | 1 min read
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#chandramohankatyal, #HindiPoetry, #हिंदीकविता

असुरक्षा की भावना मन में भय उत्पन्न करती है | मन से भय कैसे मिटे | 

इस एहसास को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों

के माध्यम से साझा कर रहा हूँ

जब वक़्त कहीं पे जाए ठहर,

और घुप्प अँधेरा हो जाए |

जब लगे जहाँ सूना सूना,

न कुछ सूझे न कुछ भाये ||

 

ओ परमपिता के अंश कभी,

तुम मत डरना मत घबराना |

बस अंतर्मन के दीपक से,

सब रौशन रौशन कर देना ||

 

तुम बुद्धिमतों की न सुनना,

ये तो बस भ्रम फैलाएंगे |

ये इधर उधर की बातों में,

भटकायेंगे भरमाएंगे ||

 

तो जब भी घना अँधेरा हो,

जीवन को दुखों ने घेरा हो |

मन में बैठे उस ईश्वर से ,

मांगो की जल्द सवेरा हो ||

 

✍️ ༄ चन्द्र मोहन कत्याल कवि • लेखक

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