बुरे वक़्त में
कहते हैं विपदा को शांत चित्त से स्वीकार लेना कायरता नहीं होती | वक़्त के तूफ़ान में धैर्य ही सबसे बड़ा अस्त्र है | इन्हीं भावनाओं को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |
कहते हैं विपदा को शांत चित्त से स्वीकार लेना कायरता नहीं होती |
वक़्त के तूफ़ान में धैर्य ही सबसे बड़ा अस्त्र है | इन्हीं भावनाओं को अपनी
कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |
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बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये,
यूँ ही इधर उधर आइये न जाइये |
बुरा अपने वक़्त से ही निपट जाएगा,
फ़ालतू न जोर उससे आजमाइए ||
बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये
स्याह काली रात भी गुजर जायेगी,
अंतर्मन की लौ से इसे जगमगाइये |
नामुराद लम्हें ये सारे बीत जाएंगे,
सर्वदा ही नियति से न गिड़गिड़ाइये ||
बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये
क्या पता ये ईश्वर की खेल लीला हो,
मन से इसे खेलिए और जीत जाइये |
मुस्कुराने के सबब खुद ढूंढ लीजिये,
शांत चित्त होकर थोड़ा गुनगुनाइए ||
बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये
तंत्र मंत्र कुछ भी काम नहीं करेगा,
आस्था से रब को मन में बिठाइये |
रखिये कुछ यकीं अपने धर्म कर्म में,
रोला रप्पा यहाँ वहां मत मचाइए ||
बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये
बुरे वक़्त में सिमट के बैठ जाइये
✍️ ༄ चन्द्र मोहन कत्याल ༄ कवि • लेखक
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