बनने आए थे कालिदास मातृगुप्त बन कर रह गए

महाकवि कालिदास पर आधारित रचना 'आषाढ़ का एक दिन' को बहुत ही कम शब्दों में समझाने की मेरी कोशिश मेरे शब्दों में मल्लिका- कालिदास की प्रेमिका अम्बिका- मल्लिका की माँ विलोम- मल्लिका का पति प प्रियंगु मंजरी- कालिदास की पत्नी मातृगुप्त- शासक बनने पर कालिदास का नाम

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Aarti Kushwah
Aarti Kushwah 17 Aug, 2026 | 1 min read
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संगिनी थी तुम्हारी,

सँग-सँग तुम्हारे चलती रही,

विरह बन कर तुम्हारी रचनाओं में, 

हर पल तुम्हारे सँग रही

स्वार्थ नहीं था उसका तनिक भी,

मान-सम्मान मिलने में तुम्हारे,

शामिल तो किया तुमने उसको

अपनी रचनाओं में वेदना बना कर,

पर उसकी व्यथा को तुम समझ न सके,

कालिदास को भेजा था उसने 

पर तुम तो मातृगुप्त बन कर रह गए,

थाम लिया प्रियंगुमंजरी का हाथ

और बचपन की संगिनी मल्लिका को भूल गए,

डर था तुम्हे उससे मिलने पर तुम व्यथित न हो जाओ,

मातृगुप्त की जिम्मेदारियों को न निभा पाओ,

लौट आते उस वक़्त तो ये व्यथा न होती,

नहीं थामता विलोम उसका हाथ 

और अम्बिका की बात सच न होती,

जब ऊब गए मातृगुप्त बन कर,

तो कालिदास बनने आये थे तुम,

सहम गए मल्लिका का कोरा महाकाव्य देख कर,

बनने आए थे कालिदास, 

मातृगुप्त बन कर ही रह गए तुम .......



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