सफर

नारी की कहानी

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Varsha Sharma
Varsha Sharma 24 Feb, 2021 | 1 min read
#1000poems

सफर मेरा शुरू हुआ बाबुल के घर से

 मैं चल पड़ी योध्दाअकेले घर से पुरानी यादें पुराने रिश्ते छोड़कर के 

ससुराल के सफर पर निकल पड़ी हूं घर से

 टूटता हुआ दिल कचोटता रहा जैसे कुछ पीछे छूट हो रहा

 जाने को खुश होती थी मैं हर एक सफर में 

आज क्यों उदास हूँ इतने बड़े सफर में

 बाबुल की आंखों का  कभी तारा थी मै

 साथ है जो मेरे रिश्तो को बांध लेंगे नए नए रिश्ते सफर में मिलेंगे

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Varsha Sharma

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