माँ मेरी जगन्नाथ

माँ के लिए जितना भी लिखे वो कम है

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Varsha Sharma
Varsha Sharma 21 Jun, 2021 | 1 min read
#mother

माँ मेरी जगन्नाथ


मां के हाथ हैं या 

वह खुद जगन्नाथ हैं 

सुबह-सुबह होती उसके दिन की शुरुआत हैं

अंगना बुहार कर ,तुलसी  को सींचती, 

उधर बनाती खाना और मुझे स्कूल जाने को करती वह तैयार है

पशुओं को प्रेम करना सिखाती गाय ,बिल्ली ,मुर्गियां घर में ही पालती उनको  दाने मुझसे भी डलवाती और खुद भी डालती हर एक चीज को करीने से सवारती

 बर्तन भी खुद ही मांझ ती

 खेतों में करती काम घर भी संभालती 

बाजार से लाती सब्जियां पेड़ से नारियल भी उतारती 

सोचती हूं मै कभी


तू माँ है या कोई जादू की छड़ी हमारा जीवन सवारने को कभी ना थकती 

मेरे लिए तो मां बस तू ही जगन्नाथ है

वर्षा शर्मा

दिल्ली

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Varsha Sharma

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