सौदागर ख़्वाबों का...

राह ताकता सौदागर ख़्वाबों का, रोक ना बढ़ते क़दम, कीमत चाहे ज़्यादा हो... या हो थोड़ी कम।।

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Shubhangani Sharma
Shubhangani Sharma 07 Dec, 2020 | 0 mins read
Dreams # be go getter.

बेचता हूँ ख़्वाब, क्या ख़रीदोगे??

पूरे भी होंगे, दोहरे भी होंगे...

क्या ख़ुदको बेचोगे???

जागीर ख़्वाबों की महंगी है...

कितना मोल चुकाओगे???

जो पूरे ना हुए ख़्वाब,

तो क्या बिक कर पछताओगे???

रातों की नींद, दिल का चैन,

सब खो जाएगा।

इस पर भी शायद कुछ ना, पायेगा।।

फिर क्या इस डर से,

सिर्फ हाथों पर हाथ रख बैठोगे??

महँगे हैं ख़्वाब बड़े, क्या ख़रीदोगे??

ख़रीदार के पास सिक्के हों,

इससे मुझे सरोकार नहीं...

मैं सौदागर हूँ अनोखा,

कोई साहूकार नहीं।।

राह ताकता हूँ, हिम्मत की तेरी,

क्या किस्मत भी आज़माओगे???

जो चूक गया लम्हा तो,

ख़ुद को कैसे समझाओगे???

देखता हूँ राह तेरी,

देखता हूँ कब तक आओगे...

सौदागर हूँ ख़्वाबों का,

जानता हूँ मन को ना रोक पाओगे...

उम्मीद है जल्द ही अपने,

मन को भी समझोगे।।

सौदागर हूँ ख़्वाबों का,

क्या ख़्वाब ख़रीदोगे??









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Shubhangani Sharma

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