Shamia Aftab
Shamia Aftab 02 Mar, 2022
मुख़्तसर
वक़्त मुख़्तसर लफ्ज़ मुख़्तसर रवानी में सब कर गुज़र फितरत बदल थोड़ी ज़ेहमत तो कर तराश अपने किरदार को ऐसा की करें सब फख्र रास्ता इधर रौशनी उधर चलना तो फिर भी है मगर हर कदम एक लौ बने सिर्फ एक नज़र नये रास्ते खोज लाये तू हो सरपरस्त ऐसा की सब सोये बेफिक्र

Paperwiff

by shamiaaftab

02 Mar, 2022

मुख़्तसर

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