मुख़्तसर
वक़्त मुख़्तसर
लफ्ज़ मुख़्तसर
रवानी में सब कर गुज़र
फितरत बदल
थोड़ी ज़ेहमत तो कर
तराश अपने किरदार को ऐसा
की करें सब फख्र
रास्ता इधर
रौशनी उधर
चलना तो फिर भी है मगर
हर कदम एक लौ बने
सिर्फ एक नज़र नये रास्ते खोज लाये
तू हो सरपरस्त ऐसा
की सब सोये बेफिक्र
Paperwiff
by shamiaaftab