कहानियाँ लिखी जाएँगी, दोहराई जाएँगी,
बातें ग़लत या सही, सबको बताई जाएँगी,
हर कोई अपना अपना किरदार निभाएगा,
ख़ुद को किस्से का अहम हिस्सा बताएगा,
बात सबकी सच या झूठ तो हो नहीं सकती,
महज बातें तो कहानी का भार ढो नहीं सकती,
अफ़वाहें फैलेंगी, हर किसी को ख़ुद में लपेटेंगी,
बढ़ाएँगी कद, किस्से को हकीक़त से दूर समेटेंगी,
मगर कहानी का सही अर्थ, सिर्फ़ वही समझ पाएगा,
जो कहानी को नहीं, ख़ुद को पूरी तरह परख पाएगा।
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