बहुत बदल गया मैं

बहुत बदल गया मैं शायद

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Saket Ranjan Shukla
Saket Ranjan Shukla 13 May, 2021 | 1 min read
#my_pen_my_strength

जब सँभल न पाया तो बिखर गया मैं,

ढूँढो मुझे, न जाने कहाँ, किधर गया मैं,


ज़िंदगी, पहेलियों सी लगने लगी है अब,

हर सवाल ढूँढा, ज़वाब पा सिहर गया मैं,


खेल, मेरे साथ ये तक़दीर भी खेलती आई,

जब ठोकर खाई, ख़ुदके सहारे निखर गया मैं,


हालात इतने बुरे थे नहीं की हार मानता थककर,

हद तय की अपनी, हद से भी आगे निकल गया मैं,


जाने कितने क़िरदारों में ढलता आया “साकेत" अब तक,

मौसम भी कहते हैं कि बदलते बदलते बहुत बदल गया मैं।


BY:— © Saket Ranjan Shukla

IG:— @my_pen_my_strength

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Saket Ranjan Shukla

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