पूर्णिमा का चाँद

पूर्णिमा का चाँद

Originally published in hi
❤️ 0
💬 0
👁 494
Ruchika Rai
Ruchika Rai 20 Oct, 2021 | 1 min read
Calculating read time... 0 min left

 देखो तुम नभ आज,छोड़ के सारे ही काज,

चाँद लेके आया साज, रोशनी बिखेरती।


चाँदनी की चमक में,धरती की धनक में

गगन की चहक में,ख़ुशियाँ समेटती।


जीवन में मिठास हो,प्रकाश ही प्रकाश हो,

उमंग संग श्वास हो,मस्ती भर छेड़ती।


चाँद सा शीतल बनें,नही किसी को यूँ छले,

खुश हम सदा रहे,धुन नई छेड़ती।


सोलह कला से भरा,चाँद का है रूप खिला,

चाँदनी संग ले मजा,चित्र उकेरती।


सुख समृद्ध जीवन,आनंदित तन मन,

चंचल है चितवन,पूर्णिमा सँवारती।

0 likes

Support Ruchika Rai

Please login to support the author.

Published By

Ruchika Rai

ruchikarai

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.