पतंग

पतंग

Originally published in hi
Reactions 0
10
Ruchika Rai
Ruchika Rai 14 Jan, 2022 | 1 min read



रंग बिरंगे पतंगों की तरह रहे है जिंदगी,

ईश्वर से सदा ही करूँ मैं बस यही बंदगी,

आसमान की ऊँचाई तक उड़ान ले जाऊँ

संस्कारों के डोर से बंधी हो सभी रवानगी।


एक दूसरे से न उलझे स्वतंत्र उड़ान पाये,

उलझे जो अगर कभी तो डोर कटती जाये,

हवा के रूख की तरह वक़्त को मैं समझूँ,

तभी ऊँचा उठने का प्रयास हम कर पाये।


हसरतों की ऊँची उड़ान हो आनंद पाऊँ,

ऊँचा उठकर जीवन का मधुर संगीत गाऊँ,

जीवन में गुड़ का मिठास रहे ये प्रयास हो,

बस ऐसे पतंग की तरह मैं आनंदित हो जाऊँ।


कटना फटना टूटना हकीकत का ज्ञान हो,

फिर भी ऊँचा उठने में सदा ही मान हो,

नभ की ऊँचाई जाकर खिलखिलाहट भर दूँ,

बस इतना ही मेरे मन में सदा सम्मान हो।


0 likes

Published By

Ruchika Rai

ruchikarai

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.