बनल रह
बनल रह?????
सुबह की बेला.....।
छत पर सूरज का आगमन
एक लोटकी जल ले पहुँची।
छत से नजर आई "वो औरत"
मेरी नजर उस नजर से मिली।
मुझे कुछ समझ न आया।
कुछ हिचकिचायी- सी ,
कुछ घबड़ायी हुई- सी।
मेरी नजर उसी तरफ गई।
जिधर "वोऔरत"खड़ी हैं।
मैंने कुछ ना सोचा ना समझा
बस दोनों हाथ जोड़कर
प्रणाम कर मुसकुरा दी।
"वोऔरत"वहीं से अपने
दोनों हाथों को उपर कर?
"बनल रह"कहखिलखिला दी।
????????
Paperwiff
by priyankasagar