रोटी नहीं छोटी

रोटी की कीमत

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Prem Bajaj
Prem Bajaj 02 Jan, 2021 | 1 min read

 सभी के जीवन में बहुत अहमियत रखती रोटी

सबके जीवन में सबसे अनमोल होती है  रोटी ।


चाहे तुम खाओ सब्जी संग , चाहे खाओ नमक

संग , चाहे तो मिल जाए रूखी , बस मिले ज़रूर रोटी ।


अमीर के घर फालतु है बनती , बच जाती तो जाती कुड़े में

 ग़रीब के घर तो पांच लोग हों तो खाने को होती चार रोटी ।


जब तक कोई ग़रीब मेहनत ना करें , जब तक किसान

ना अनाज पैदा करें , तब तक हमें कहां नसीब होती रोटी ।


जब पेट की क्षुधा लगाती है आग , तब कहां ये सूझता है

एक ग़रीब को कि क्यों वो कूड़े से भी बीन रहा है रोटी ।


कड़कती धूप में , हम बैठे हैं ए. सी. में तो ग़रीब चलता

नंगे पांव तपती सड़क पर , बस पाने को एक टुकड़ा रोटी ।


रोटी की कीमत पूछने कोई भूख से तड़पते बच्चे की मां से

तो चुन रही कूड़े के ढेर में , उसके लिए चीज़ नहीं छोटी ये रोटी ।


जितना चाहे हो धन- दौलत , नहीं सूझा सकता क्षुधा किसी

भूखे - तरसते बच्चे की , उसके लिए कभी छोटी नहीं होती रोटी ।


दौलत वाला खाएं सोने के थाल में , बिमारी खाएं अस्पताल में

*प्रेम * ना रह पाए रोटी के बिना , हर इन्सान मांगे बस एक रोटी ।

प्रेम बजाज



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Prem Bajaj

prembajaj1

Comments

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  • Sonia Madaan · 1 year ago last edited 1 year ago

    Well written 👍

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