prem bajaj
prem bajaj 12 Apr, 2022
इंतजार
करती भोर का इंतजार कब से तड़प रही रात ये, कहीं मिलन तो कहीं आंसुओं की देखती बरसात ये, जलती शमां शब- भर, साथ में परवाने को भी कर देती ख़ाक ये।

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by prembajaj

12 Apr, 2022

इंतजार

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