तेरे संग एक सिंपल सी कॉफी भी ट्रीट लगती है

कॉफी और वो

Pallavi verma
17 Jan, 2020 • 1 min read min read • hi
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तेरे संग एक सिंपल सी कॉफी भी  ट्रीट  लगती है

तेरा संग एक सिंपल सी कॉफी भी ट्रीट लगता है

बहुत बड़े घर में राहत तय कर लेंगे सिया तेरा, तू देख बेटा।

सिया मुस्करा कर चुप हो गई।

उसे तो केवल राघव ही पसंद था, उस दिन से जिस दिन सभी दोस्त मिलकर राघव के कॉफी शॉप मे मजाक मजाक में यूं ही बोल गए थे,

राम जी आप अपनी सीता से बिल के पैसे लेंगे?

और घने से बाल, गहरी सी आँख लिये राघव मेरे चहरे पर आँख मारनेते हुए झुका, मै संभली, उसने बिल बुक उठाई, और बिबा पैसे के लिए ही चल दिया।

पता नहीं, उस केफे की याद आती ही सांसे इतनी गहरी क्यू चलने लगती हैं।

पापा की, बड़े घर वाली बात पर क्यूँ तो चिड़ आती है।

किसी सवाल का जबाव नहीं पता, बस इतना पता है कि जब भी दोस्त छेड़ते है तो सब कुछ अच्छा सा सा लगता है।

आज मेरी फ्रेंड मिहिका का बर्थडे है, और उसी केफे में जाने का तय हुआ है, मुझे घंटो हो गये सोचने की क्या पहनूँ।

गुलाबी, पीला, हरा या !! हाँ !! मै वेइलेट कलर की ड्रेस पहनती हूँ।

इने में बीसियोँ बार निहार कर केफे पहुँची, काउंटर में ही था वो, मुझे देखकर कुछ सोच हो गई।

मेरे हाई सोसाइटी फ्रेंड उसे वेल्यू नहीं दे रहे थे, मै थी की बस उसे घुरे जा रही थी, वे काम में मगन और भी भला लग रहे थे।

उसकी कशिश मुझे पागल कर रही थी।

मैं इस कशमकश से तंग आ गया था अचानक से उठी तेज कदमों से चलते हुए उसके काउंटर पर ढेर हो गया वह अभी भी अपने काम में मगन था।

मैंने उससे कहा तुमको मुझसे कुछ कहना है,?

उसने कहा जी मैं समझा नहीं।

समझे, नहीं या नहीं समझना चाहते हैं।

शायद वह पूरी तरह से समझ गया था।

मैं और आप दो अलग-अलग नाव में सवार मेरे पास एक कैफे के अलावा कुछ नहीं है।

मैंने कहा मुझे कुछ नहीं करना चाहिए, बड़े घर की जरूर हूँ जरूरते बहुत छोटी है मेरी।

अब तक मेरी आँखों में आंसू आ चुके थे, अभी तक सतर्कता से राधा को मेरे आंसू पोछते हुए बोला। क्या दे सकूँगा मै तुम?

मेरे साथ कॉफी पी लो! मैंने तपाक से कहा।

वह हौले से मुस्कुराया

मैं उसके म्यूजिक सेन्स में गया, एक गाना लगाया। और उसका हाथ पकड़ एक टेबल पर बिठा दिया। गोकशी आ गई थी ,,,। गाना बज रहा था। "आप भाग एक सिंपल सी कॉफी भी ट्रीट लगता है"।

मेरे दोस्तों को सारा माजरा समझ आ चुका था अब राघव भी हमारे ग्रुप में शामिल था।

अब भी हमारी निगाहें एक दूसरे पर ही टिकी थी।

पल्लवी वर्मा

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