#घर एक औरत का
नन्ही सी गुड़िया बनकर मैं तेरी गोद में आई.....
ना रही मैं कभी अकेली तू हर पल बनी मेरी परछाई भाई बहनों के साथ मैंने इसी घर में करी लड़ाई..... इसी घर में तो रहकर मेरी पूरी हुई पढ़ाई...
इसी घर में रहकर मैं हो गई जवान.....
कदम कदम पर मैंने रखा इस घर का मान....
मुझे दूसरे घर जाना है इस बात की रट सब ने लगाई और तुमने भी कह दिया
मां मैं तो थी इस घर में पराई
जिस घर में रहकर मैंने हर एक सपना सजाया था आज मुझे पता चला वो घर तो पराया था
Paperwiff
by nehabhanot