पर्यावरण से दोस्ती कीजिए!

पर्यावरण से दोस्ती कीजिए और अपने दोस्त पर्यावरण का पूरा ख़्याल रखिए!!

Kumar Sandeep
05 Jun, 2020 • 1 min read min read • hi
❤️ 3 💬 4 👁 1421
#Save environment #Save life #Save tree #Environment
पर्यावरण से दोस्ती कीजिए!

Photo by Markus Spiske on Unsplash

पर्यावरण से दोस्ती कीजिए और अपने दोस्त का पूरा ख़्याल रखिये। एक दोस्त का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने दोस्त के जीवन में आने वाले हर दुःखों को दूर करें व हर मुश्किल हालात में उसके साथ रहे। एक नज़र जरा डालिए पर्यावरण की ओर पर्यावरण हर मुश्किल हालात में जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारा साथ निभाता है। दोस्ती निभाना तो कोई पर्यावरण से सीखे। मानव ही हैं जो पर्यावरण के साथ वक्त-वक्त पर खिलवाड़ करता रहता है। यह अनुचित है।


पर्यावरण हम इंसानों से कुछ विशेष नहीं चाहता है। बस पर्यावरण की चाहत यही होती है कि हम पेड़-पौधों का संरक्षण करें। असमय ही अपना आशियाना बनाने हेतु पेड़-पौधों को न काटें। नदी को दूषित न करें। नदीयों को स्वच्छ रखें। बहुत सारे पेड़-पौधे लगाएं। बस इतनी ही तो ख्वाहिश है पर्यावरण की। और हम इंसान समझ ही नहीं पा रहे हैं पर्यावरण की अभिलाषा या यूं कहें कि समझकर भी नासमझ बन रहे हैं।


पर्यावरण में संतुलन बना रहे इसलिए अति आवश्यक है कि हम पेड़-पौधों का पूरा ख़्याल रखें। आलिशान घर बनाने के उद्देश्य से या बड़ी-बड़ी कंपनियां स्थापित करने के उद्देश्य से बेवक्त ही पेड़-पौधों को न काटें। यदि हम पेड़-पौधों का ख़्याल नहीं रखेंगे, यदि पर्यावरण में संतुलन बनाएं रखने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाएंगे, तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा इस धरा पर। पेड़-पौधों के बिना हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं है इस बात का विशेष ख़्याल रखें।


जितना हो सके पेड़-पौध लगाएं। नदियों में अवांछनीय पदार्थों को प्रवाहित न करें। पेड़-पौधों के दर्द को महसूस करें व असमय पेड़-पौधों को काटें नहीं। परोपकारी पेड़ की उदारता को स्मरण रखते हुए सर्वदा पेड़-पौधों की सेवा करें। यह स्मरण रहे कि पेड़-पौधे बहुत कुछ देते हैं हम इंसानों को। तो हमारी भी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम पर्यावरण में संतुलन बनाएं रखने के लिए पेड़-पौधों का संरक्षण करें।


©कुमार संदीप

मौलिक, स्वरचित, अप्रकाशित

3 likes
☕

Support Kumar Sandeep

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Kumar Sandeep
Published By

Kumar Sandeep

@Kumar_Sandeep

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

  • Manisha Bhartia · 6 years ago last edited 6 years ago

    उम्दा लेखन

  • Praveen Miss · 6 years ago last edited 6 years ago

    Awesome

  • Kumar Sandeep · 6 years ago last edited 6 years ago

    धन्यवाद मनिषा मैम

  • Kumar Sandeep · 6 years ago last edited 6 years ago

    @धन्यवाद प्रवीण भाई जी

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Self-help
Xleem • 01 Jul, 2026 • 1 min read min

Life

Life is a long journey, and most of us spend it chasing what we lack, while forgetting to be grateful for what we already hold.

109 0
More stories in Self-help
Xleem • 01 Jul, 2026 • 1 min read min

Li3f

Just read it

99 1
More stories in Self-help
Abdul Aleem nsk • 29 Jun, 2025 • 3 mins read min

"The Boy Who Held Storms in Silence" (Fiction)

A silent boy, crushed by cruelty and unseen by the world, carries his pain alone—until it quietly ends him.

506 0
More stories in Self-help
fazal Esaf • 02 Jun, 2025 • 1 min read min

एक मुस्लिम गरीब लड़के की कहानी जो पढ़ना चाहता है

यह कहानी रहीम नाम के एक गरीब और मेहनती मुस्लिम लड़के की है, जिसके जीवन में कम उम्र में ही मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ता है। जब वह सिर्फ तीन साल का था, तभी उसके अब्बा का इंतकाल हो जाता है, और घर की सारी ज़िम्मेदारी उसकी अम्मी, सकीना, पर आ जाती है। सकीना दूसरों के घरों में मेड का काम करती है, लेकिन उसकी कमाई इतनी कम होती है कि दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से मिलती है, और रहीम को स्कूल भेजने का सपना अधूरा रह जाता है। इसके बावजूद, रहीम के अंदर पढ़ने की गहरी लगन है। उसकी आँखें ज्ञान की दुनिया को देखने का सपना देखती हैं और वह अपनी अम्मी को गरीबी और दूसरों के घरों में काम करने की मजबूरी से आज़ाद कराना चाहता है। अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए, रहीम छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर देता है। वह शहर की एक छोटी सी परचून की दुकान पर दिन भर ईमानदारी और लगन से काम करता है। शाम होते ही, रहीम अपनी थकान को दरकिनार करते हुए पास के 'शाम के मदरसे' में पढ़ने चला जाता है, जहाँ गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। मदरसे से लौटने के बाद भी वह अपनी अम्मी की मदद करता है, घर के कामों में हाथ बँटाता है। रविवार का दिन उनके लिए खास होता है, जब रहीम अपनी अम्मी से अपने बड़े-बड़े सपने साझा करता है – खूब पढ़कर बड़ा आदमी बनना और अम्मी को आराम भरी ज़िंदगी देना। कहानी इस बात पर भी जोर देती है कि कैसे रहीम अपनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अच्छी आदतों को बनाए रखता है। जहाँ उसके आस-पास के कई लड़के गरीबी से हार मानकर गलत रास्तों पर चले जाते हैं, वहीं रहीम न केवल खुद ईमानदार और नेक रहता है, बल्कि अपने दोस्तों और पड़ोस के लड़कों को भी पढ़ाई की अहमियत समझाता है और उन्हें सही रास्ता दिखाता है। वह उन्हें बताता है कि शिक्षा ही गरीबी से निकलने का एकमात्र ज़रिया है, न कि बुरे काम। यह कहानी मेहनत, लगन और नैतिक मूल्यों का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास से कोई भी व्यक्ति अपनी मुश्किलों को पार कर सकता है।

883 0