मेरे मोहन

Its about lord Krishna

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Shikhar Pandey
Shikhar Pandey 01 Jun, 2024 | 1 min read

मानव शरीर चित कोमल नयन धरि

 लोगन के जीवन को तारि तारि देत हैं

और प्रेम प्रीत त्याग धर्म मन अभिमान ज्ञान

 आशा अभिलाषा सब वारि वारि देत हैं


 मोहन के प्यार में दीवानी हुई मीरा को भी 

जीवन मरण से उभार डार देत हैं 

और शूल से वो फूल तक पथ निर्माण करि

 मीरा की भी भक्ति को निहाल करि देत हैं


 माधव की प्यारी मुस्कान से ये गोपियाँ तो 

जीवन के सब दुःख दर्द त्याग देती हैं 

और श्याम का वो नटखट बालपन देखने को

 गोपियाँ ये सब लोक लाज त्याग देती हैं 


अरे सूझ भूझ से वो महाभारत के युद्ध को भी

 जग कल्याण की मिशाल करि देत हैं 

अर्थ क्या अनर्थ क्या है अंत क्या अनंत क्या है

 मान सम्मान को बहाल करि देत हैं 


गीता का वो ज्ञान हो या प्रेम का प्रमाण हो या

 आशा में विश्वास की उबाल भरी देत हैं 

राधा से मिलान की वो प्रेम भरी लीलाओं में

 लोगों को विरह से मलाल करि देत हैं 


जब जब करुण पुकार किसी द्रौपदी की

 जीवन मरण बलिहार करि देत हैं 

चिर का वो चीर हो या ह्रदय का वो पीर हो 

नयन नयन में ही सब वारि देत हैं


 द्रौपदी के पांच गुण वाले वर मांगने पे 

पांच पांच पांडवो को नाथ करि देत हैं 

और नारी प्रतिशोध की प्रचंड अग्नि ताप में

 वो कौरवों की जाती का विनाश करि देत हैं

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