अज्ञानी हैं हम माते, आत्मज्ञान का हमें वर दे,
अपने अबोध बालकों को बुद्धिमत्ता से भर दे,
दे-दे स्थान अपनी करुणामई गोद में, हे माता,
आशीष का कर कमल मस्तक पर हमारे धर दे,
माया ग्रसित इस मृत्युलोक में, माँ तेरे ही सहारे हैं,
संताप से व्याकुल, मंदबुद्धि हम बालक तिहारे हैं,
व्यथित हृदय हमारा केवल तुझसे आस रखता है,
कर मार्ग प्रशस्त हमारा, तूने ही सब काज संवारे हैं,
जो कुछ भी प्राप्त हमें, सब तेरे आशीषों का फल है,
तेरा स्नेहिल हाथ है सर पर तो सुनहरा हरेक कल है,
तेरी महिमा हे ज्ञानदायिनी, कौन नहीं जानता जग में,
हे वीणावादिनि माँ शारदे, तेरा हर शरणार्थी सफल है,
हम मूढ़ अल्पज्ञानी हैं माँ, मंत्रोच्चारण का हमें ज्ञान नहीं,
साधना से अनभिज्ञ हम, कर भी पाते हैं तेरा ध्यान नहीं,
श्रद्धावश बस मन ही मन, तेरी अनुकम्पा के गीत गाते हैं,
पूजन विधि नहीं ज्ञात हमें, भजन कीर्तन का भी भान नहीं,
तदोपरांत भी तेरी करुण कृपादृष्टि से अभिभूत हुए जाते हैं,
हे हँसवाहिनी, माँ सरस्वती, हम करबद्ध शीष तुझे नवाते हैं।
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