हर लम्हे में दिल हारा नहीं करते

A Hindi ghazal describing the graceful beauty of a woman — her hair like monsoon clouds, a shining bindi, expressive eyes, soft cheeks and smiling lips — while the poet reflects on restraint in love, reminding himself not to lose his heart in every moment of a first meeting.

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Saket Ranjan Shukla
Saket Ranjan Shukla 09 Mar, 2026 | 1 min read
#my_pen_my_strength

मिलते ही किसी से आँखों का उसे तारा नहीं करते,

बिना भांपे तरबियत, उसे जान से प्यारा नहीं करते,


नहीं लुटाते बेइंतहां जागीर-ए-इश्क़ किसी पर यूँ ही,

रूहदारी के खेल में ख़ुद को यूँ तो बेचारा नहीं करते,


हाँ माना कि वो चश्म-ए-ख़्वाब से आई हुई लगती हैं,

उनकी एक झलक पाने को हर कुछ वारा नहीं करते,


हैं जुल्फ़ें उनकी बरसते सावन के कारे बदरा से हसीं,

बलखाती लटें उनकी, यूँ नज़रों से संवारा नहीं करते,


बिंदी उनके माथे पर यूँ जैसे आसमां सजाता चाँद हो,

इस चाँदनी की ओट में, सुकूँ को बेसहारा नहीं करते,


भौहें उनकी मानो बातूनी पहरेदार हों, उन आँखों की,

उनके सवालिया इशारों का जवाबी इशारा नहीं करते,


माना उनकी कनखियों के बाणों ने, बिंध दिया है मन,

इस मदहोशी में मगर, हकीक़त से किनारा नहीं करते,


कश्मीर की वादियों में फले सेबों से हैं रूखसार उनके,

टकटकी लगाकर नाज़ुक नज़ाकतें निहारा नहीं करते,


गुलाब की सुर्ख पंखुड़ियों सी लबों से मुस्कुराती हैं वो,

इन अदाओं के बीमार, हक़ीक़त में गुजारा नहीं करते,


पहली बार मिले हैं हम और वो समझा रहीं हैं मुझे कि,

“साकेत" मुलाक़ात के हर लम्हें में दिल हारा नहीं करते।


BY :— © Saket Ranjan Shukla

IG :— @my_pen_my_strength

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