पवड़िया नृत्य

बिहार का एक लोक नृत्य, जो बच्चे होने की खुशी में पुरुषों दारा स्त्रीयों के भेष में किया जाता है।

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Ruchika Rai
Ruchika Rai 20 Oct, 2021 | 0 mins read




घरे भइले ललना सुकुमार,

खुशी मिलेला अपार,

सभे गावे मंगलाचार,

हरषत बा जियरा हमार।


बाबा के अँखिया चमकत बावे,

अम्मा के मनवा नाचत झूमत बावे,

ननदी अइली शगुन हजार,

हरषत बा घर दुआर।


सुनी के ललना के घर में अइले,

पवड़िया टोली झुमत अइले,

ढोलक थाप पर नाचे बार बार

भीड़ लागल घर दुआर।


पवड़िया के अइले से हलचल भईले,

उनकर नाच से घर भर झूमी गईले,

उनकर नाच ह शुभ लोकाचार,

हरषत बा घर परिवार।


पवड़िया नचले दिल खोली के,

मांगले शगुन के रुपया हजार,

दिहेन ललना के भर भर झोरी आशीर्वाद,

दिही अम्मा शगुन दिल खोल के ई बार।


के नचिहे खुशी खुशी,

जेंग नाचेले पवड़िया के टोली,

ई त खुशी आवेले भीतर से हर बार,

सभे नाचे झूम झूम के।

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Ruchika Rai

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