बगावत

बगावत

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Ruchika Rai
Ruchika Rai 29 Nov, 2021 | 1 min read

बगावत ये दिल खुद से करना चाहता है,

जमाने की दौड़ में शामिल हो बढ़ना चाहता है।


चाहता है हर उन बेड़ियों को तोड़ दे,

जो राह में रोड़े बनकर है पड़े

अपनी खुशी को महसूस कर जीना चाहता है,

जमाने की दौड़ में शामिल हो बढ़ना चाहता है।


बहुत देखे है इसने दुनिया के तमाशे,

रंग बदलती दुनिया में अपनों के धोखे,

आगे बढ़ने की होड़ में साथ वालों को गिराना,

मतलब निकल जाये तो पीछा छुड़ाना,

अब ये दिल इन बातों से *उबर* जीना चाहता है,

जमाने की दौड़ में शामिल हो बढ़ना चाहता है।


देखा है लोगों को विनम्रता को कमजोरी समझते,

सम्मान में झुकने वालों को और झुकाते,

आत्मसम्मान पर सदा ही चोट पहुँचाते,

दूसरों के दर्द को सरेआम तमाशा बनाते,

नया सबक जिंदगी को सीखाना चाहता है,

अब ये दिल फिर से खुल कर मुस्कुराना चाहता है।

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Ruchika Rai

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