लेख
बुजुर्गों की सेवा का सुख
********************
आज सारा देश अंतराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस मना रहा है। पुराने जमाने मे संयुक्त परिवार हुआ करते थे जिनमें दादा दादी काका काकी देवर भाभी सास ससुर देवर जेठ छोटा भाई बड़ा भाई काकी अम्मा सभी रिश्ते एक साथ एक ही घर मे एक साथ रहा करते थे। अपनत्व की भावना व रिश्तों में मिठास हुआ करती थी। आर्थिक समस्या से कोई भी सदस्य परेशान नहीं रहता था। सुख दुख हानि लाभ गम खुशी में सभी एक दूसरे का सहयोग करते थे।संयुक्त परिवार होने से एकता रहती थी । बुजुर्गों की घर मे सभी सदस्य बात मानते थे। वे घर का मुखिया होता था। वह सबको उचित सलाह देकर न्याय करता था। घर के प्रत्येक सदस्य में संस्कार आये उसलिए वह रात दिन घर परिवार पर ध्यान देता चिंता रखता था। घर मे हर दिन उत्सव होता था। सुख से जीवन गुजरता था।
लेकिन आज हम देखते हैं घरों में बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है। हर सिटी में अब वृद्धाश्रम खुल गए नई पीढ़ी के विचार पुरानी पीढ़ी से नहीं मिलते इसलिए वे बुजुर्गों को अपनों से दूर रखना पसंद करने लगे हैं। कोई बुजुर्गों को भोजन नहीं देते तो कोई घर से निकाल देते हैं। अब एकल परिवारों की संख्या दिनिदिन बढ़ रही है। एजल परिवार में पति पत्नी व उनके बच्चे के अलावा अन्य कोई भी सदस्य नहीं रहता है
बुजुर्गों की सेवा अब कौन करता है। धन एकत्रित करने के पीछे पड़े लोग अपने माता पिता को बुजुर्ग होते ही घर के आउट रूम में भेज देते हैं। जब वे बुखार खांसी आदि लम्बी बीमारी से लड़ते हैं तब घर वाले उनकी दवाई के खर्चे से तंग आ उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं।
आजकल के बच्चे अपने दादा दादी नाना नानी को नहीं जानते। रिश्ते सिमट रहे है। भौतिक साधनों को एकत्रित करने की होड़ में आज का आदमी रात दिन मेहनत कर रुपये कमाने में लगा है।
माता पिता की सेवा भगवान राम ने की ऐसी सेवा सुबह उठे तो माता पिता के चरण छुए आशीर्वाद ले ये सब कहाँ देखने को मिलता है। हाय व बाय का कल्चर आ गया है।
आओ फिर से बुजुर्गों को घर लाएं फिर भाव से प्रेम से दीवाली होली सब त्योहार मनाएं।
कहते हैं कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से सब काम सफल हो जाते हैं
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
साहित्यकार
भवानीमंडी
Paperwiff
by rajeshkumarsharma