बदला
बदले की भावना जो तू मन में लाए..
अपना सुख और चैन गवाएं..
कर्म की जो करता बातें इतनी सारी..
फ़िर क्यों ना उस पर गौर फरमाए..
बदले की भावना को परे रखकर..
तू सब कर निश्छल मन रखकर..
वक्त बड़ा बलवान होता है..
कर्म का सब पर प्रहार होता है..
बदले की भावना जो तू मन में लाए..
अपना सुख और चैन गवाएं..
Paperwiff
by priyaaggarwal1